धन्य है राजेन्द्र बाबू की जन्मभूमि, यहीं आजादी के लिए एक साथ शहीद हो गए थे 27 बिहारी क्रांतिकारी

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पटना: देश की आजादी की लड़ाई में बिहार के योगदान को भूला नहीं जा सकता है। देश को आजादी भले ही वर्ष 1947 में मिली हो, लेकिन बिहार की धरती पर स्वतंत्रता का उद्घोष 1857 में ही हो गया था। बिहार के आजादी के दीवानों ने आजादी की लड़ाई में अपनी कुर्बानी देकर देश को आजादी की राह पर आगे बढ़ा दिया। भारत के पहले राष्ट्रपति बाबू राजेन्द्र प्रसाद की जन्मभूमि सीवान जिले में आजादी के 27 दीवानों ने एक साथ अपनी कुर्बानी दे दी थी।

इस जिले के महाराजगंज में एक गांव ऐसा है जहां एक-दो नहीं, बल्कि 27 स्वतंत्रता सेनानी हुए। यह गांव है बंगरा, जहां के स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपनी जान दे दी। स्वतंत्रता सेनानियों के गांव के रूप में चर्चित इस गांव के कई योद्धाओं ने मातृभूमि की आजादी के लिए अपने को कुर्बान कर दिया, तो कई ने अंग्रेजों की प्रताड़ना के बावजूद अपना सिर नीचा नहीं किया। फिरंगियों के दांत खट्टे करने वाले अमर शहीद देवशरण सिंह अंग्रेजी हुकुमत की गोली का शिकार हो गए। यही कारण है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बंगरा गांव का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है।

लोगों के बीच चर्चा होती है कि देश का शायद ही कोई ऐसा गांव होगा जहां 27 स्वतंत्रता सेनानियों की लंबी लिस्ट होगी। देवशरण सिंह के अलावा रामलखन सिंह, टुकड़ सिंह, गजाधर सिंह, रामधन राम, रामपृत सिंह, सुंदर सिंह, रामपरीक्षण सिंह, शालीग्राम सिंह, गोरख सिंह, फेंकु सिंह, जुठन सिंह, काली सिंह, सूर्यदेव सिंह, बमबहादुर सिंह, राजनारायण उपाध्याय, रामएकबाल सिंह, तिलेश्वर सिंह, देवपूजन सिंह, रघुवीर सिंह, नागेश्वर सिंह, शिव कुमार सिंह, झूलन सिंह, राजाराम सिंह, सीता राम सिंह, मुंशी सिंह व सुरेन्द्र प्रसाद सिंह ने देश की आजादी की लड़ाई लड़ बंगरा गांव की मिट्टी को धन्य कर दिया था। गोरख सिंह, सीताराम सिंह व राजाराम सिंह को अंग्रेज गिरफ्तार नहीं कर सके तो इनके घर फूंक डाले। बावजूद इनकी देशभक्ति में कोई कमी नहीं आई।

सीताराम सिंह, मुंशी सिंह व सुरेन्द्र प्रसाद सिंह आज भी जीवित हैं। 96 वर्षीय सीताराम सिंह अंग्रेजों के जुल्म की कहानी सुनाते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वे बताते हैं कि देशभक्तों ने अपनी कुर्बानियां देकर देश को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त कराया। हालांकि देश की मौजूदा परिस्थिति को देख जीवित स्वतंत्रता सेनानियों के दिलों में टीस भी है। सीताराम सिंह कहते हैं कि आज देश में भ्रष्टाचार व घोटाला चरम पर है। राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए नेता लोगों को आपस में बांट रहे हैं। देश में साम्प्रदायिकता का जहर घोला जा रहा है। बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, सड़क, पेयजल आदि के लिए लोग तरस रहे हैं। क्या ऐसे ही दिन के लिए अपनी जानों की बाजी लगा लोगों ने देश को आजादी दिलाई थी।

Source: Live Bihar

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