बिना कोविड सर्टिफिकेट दर्जनभर आश्रितों को किया 27 लाख का भुगतान, ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा

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मुजफ्फरपुर जिले में कोविड मृतकों के आश्रितों को अनुदान देने में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। इसे महालेखाकार की ऑडिट टीम ने उजागर किया है। इस पर आपदा प्रबंधन विभाग को जवाब देते नहीं बन रहा है। दरअसल, वैसे मृतकों के आश्रितों को भी अनुदान का भुगतान कर दिया गया, जिनका कोविड सर्टिफिकेट भी नहीं था। इस तरह के करीब दर्जनभर मामले पकड़ में आने के बाद महालेखाकार ने जांच के निर्देश दिए हैं।

विभाग से विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा है। कुल 27 लाख का भुगतान बिना कोविड सर्टिफिकेट कर दिया गया। महालेखाकार ने कहा है कि ऑडिट टीम ने कोविड अनुदान भुगतान पर जो आपत्ति दर्ज की है, वह बेहद गंभीर हैं। ऑडिट के दौरान पाया गया कि दर्जनभर मृतकों के जमा किए गए दस्तावेज में कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट ही नहीं थी।

जांच के क्रम में जिन मृतकों के दस्तावेज में गड़बड़ी पकड़ी गई है, उनमें मो. मुख्तार आलम का पुत्र मरहूम मो. ऐनुल हक, अमृता देवी का पति स्व. कामेश्वर सिंह, राजू प्रसाद पासवान की पत्नी स्व. अनीता देवी, नूतन कुमारी व प्रणिता कुमारी की मां स्व. प्रभा श्रीवास्तव, भगवान लाल सहनी का पुत्र स्व. रवि रंजन कुमार और रामचंद्र भक्त की पत्नी स्व. रूपकली देवी के नाम शामिल हैं।

इन मृतकों के आश्रितों को कुल 27 लाख का भुगतान बिना कोविड सर्टिफिकेट कर दिया गया। आश्रितों को चार-चार लाख रुपये राज्य मद व 50-50 हजार रुपये केंद्र सरकार के मद से भुगतान किया गया। महालेखाकार ने आपत्ति जताई है कि इस तरह के दर्जनों मामले हो सकते हैं जिनकी जांच आवश्यक है। महालेखाकार ने इस मामले में जिला प्रशासन से रिकार्ड की मांग की है। कहा है कि मामले की विस्तृत जांच कराई जाए।

कोविड मृतक अनुदान में इस अनियमितता के उजागर होने के बाद आपदा प्रबंधन कार्यालय से लेकर सदर अस्पताल तक हड़कंप है। ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद अबतक हुए भुगतान की सारी फाइल खंगाली जा रही है। आशंका है कि आश्रितों को जल्द भुगतान के चक्कर में कर्मचारियों ने विभागीय जल्दबाजी का फायदा उठाया होगा। फिलहाल, जिले में भुगतान किए गए सारे मामलों की जांच शुरू हो गई है।

698 परिवारों को कोविड अनुदान का इंतजार

मुजफ्फरपुर। जिले में कोविड अनुदान के मामले बड़ी संख्या में लंबित हैं। करीब 698 मृतकों के परिजन मुआवजे के लिए भटक रहे हैं जबकि आवेदन अब भी जमा हो रहे हैं। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरपुर के कुल 1288 कोविड मरीजों की मौत हुई। इनमें राज्य के बाहर व दूसरे जिलों में भी मरे मुजफ्फरपुर के मरीजों की संख्या शामिल है। 1288 में से 631 कोविड मृतकों का ब्योरा ही कोविन पोर्टल पर अपलोड किया गया था। इनमें से 590 मृतकों के आश्रितों को अनुदान का भुगतान हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1288 में से जिले के भीतर 1063 कोविड मरीजों की मौत हुई। इनमें से 432 मृतकों का ब्योरा कोविड पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाया है। 73 मरीज वैसे थे, जो मूल रूप से मुजफ्फरपुर के थे, लेकिन इनकी मौत दूसरे राज्यों में हुई है।

आपदा प्रबंधन के अपर समाहर्ता डॉ. अजय कुमार ने कहा, ‘जहां तक मेरी जानकारी है, बिना कोविड पॉजिटिव सर्टिफिकेट के किसी का भुगतान नहीं किया गया है। ऑडिट रिपोर्ट मेरी जानकारी में नहीं है। दी गई जानकारी के आधार पर सोमवार को इसकी पड़ताल की जाएगी।’

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