बिहार का लाल और गुजरात में आइएएस अधिकारी बना देश की स्वच्छता अभियान का गौरव

बिहारी जुनून

पटना : कुछ कर गुजरने की तमन्ना लेकर संघर्ष और सरोकार के भाव के साथ किया गया सार्थक प्रयास किसी को भी गर्व करने वाली ऊंचाई तक पहुंचा सकता है. उन्हीं में से एक हैं डॉ. रणजीत कुमार सिंह. अपने नाम के अनुरूप उन्होंने नि:स्वार्थ सेवा के साथ समाज सेवा के रण में अपने कर्म से विजय पताका फहराने का काम किया है. बिहार के रहने वाले डॉ. रणजीत को कर्मभूमि का क्षेत्र गुजरात भले मिला हो, लेकिन उनका दिल आज भी बिहार में बसता है.

गुजरात में रहते हुए उन्होंने स्वच्छता को लेकर ऐसा कर दिया है, जिससे पूरा बिहार गौरवान्वित है. बिहार के वैशाली जिला के देसरी गांव के श्री रामटहल सिंह(पिता) और माता महादेवी पटेल के घर- आंगन में जन्मे डॉ रणजीत ने 2008 में यूपीएससी  परीक्षा में सफल होकर आईएएस बने और कई राष्ट्रीय पुरस्कारों को भी प्राप्त किया है.वर्तमान में गुजरात के नर्मदा जिला में डीडीओ सह जिलाधिकारी पद पर पदस्थापित डॉ रणजीत कुमार सिंह को स्वच्छता कार्यक्रम को सफल और बेहतर बनाने के लिए 02 अक्टूबर को दो पुरस्कार मिले.

गांधीजी आजादी के समान स्वच्छता को भी मानव विकास के लिए बहुपयोगी मानते थे. वर्तमान केंद्रीय सरकार ने गांधीजी के आदर्शों को पूरा करने के लिए देशव्यापी स्वच्छता कार्यक्रम को शुरू किया है. इसके लिए जिला स्तरीय स्वच्छता कार्यक्रम को बढ़ावा दिया गया है. इसी स्वच्छता कार्यक्रम के आलोक में बेहतर कार्यों के लिए पुरस्कृत भी किया जाता है. इसी संदर्भ में डॉ सिंह को 02 अक्तूबर को दो अवार्ड दिया गया. दोनों ही पुरस्कार केंद्रीय पुरस्कार हैं. एक पुरस्कार पोरबंदर में जबकि दूसरा उसी समय नयी दिल्ली में दिया गया.

पहला अवार्ड स्वच्छता दर्पण का है, जो नर्मदा जिला को देश भर के समस्त जिलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए मिला. इसके लिए विभिन्न इंडिकेटर थे. मात्र 4 महीने में समस्त इंडिकेटरो में नर्मदा जिला सर्वप्रथम स्थान प्राप्त किया. यह पुरस्कार गुजरात के पोरबंदर के कीर्ति मंदिर (बापू के जन्मस्थली)में माननीय राष्ट्रपति के उपस्थिति में गुजरात के माननीय राजपाल श्री ओमप्रकाश कोहली और माननीय मुख्यमंत्री श्री विजय रूपानी द्वारा संयुक्त रूप से डॉ सिंह को दिया गया.

जबकि दूसरा पुरस्कार दिल्ली के विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री के उपस्थिति में केंद्रीय जल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती द्वारा दिया गया. इस पुरस्कार को डॉ सिंह के पोरबंदर में व्यस्तता के कारण उनके लिए नर्मदा जिले के स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक ने प्राप्त किया.  बिहार के रहने वाले इस लाल के नेतृत्व में नर्मदा जिला लगातार दो वर्ष अवार्ड प्राप्त किया. दोनों ही पुरस्कार में एक, एक लाख नकद राशि, स्मृति चिह्न और मेडल प्राप्त हुआ. यहां यह ध्यातव्य है कि इससे पहले  भी गुजरात रत्न पुरस्कार मिल चुका है.

साथ ही लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी स्वच्छता कार्यक्रम के लिए अपना नाम दर्ज करा चुके है. बताते चले कि ये बिहार से ज्यादा से ज्यादा लोगों को यूपीएससी,बीपीएससी परीक्षा में सफल बनाने के लिए मिशन 50 संस्थान को चला रहे है. डॉ आनंद राज के निर्देशन में यह संस्था प्रतिवर्ष (अब दो बार)  चयनित 50 छात्रों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहा है. इस बार चयन परीक्षा 15 अक्तूबर को है. इस GS आधारित चयन परीक्षा में 50% अंक प्राप्त करने वालों को यूपीएससी/ बीपीएससी का सिलेबस बोरिंग रोड, नया टोला और बाजार समिति ब्रांच में पढ़ाया जायेगा. इसके लिए आवेदन आमंत्रित किया जा रहा है.

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