बिहार के लाल ने देश को दिया पहला लड़ाकू तेजस विमान

बिहारी जुनून

पटना : दरभंगा का छोटा सा गांव बाउर जिसकी पहचान अब राष्ट्रीय फलक पर है। इस गांव के एक नहीं दो-दो लाल ने कमाल किया है। गांव के साथ-साथ देश का मान बढ़ाया है। देश को पहली महिला फाइटर पायलट भावना कंठ भी इसी गांव से है।हाल में एयरफोर्स के बेड़े में शामिल ‘तेजस’ विमान की नींव रखने वाले वैज्ञानिकों में एक वैज्ञानिक डॉ मानस बिहारी वर्मा भी इसी गांव से हैं। इन्होंने वर्षों पहले जो सपना देखा था वो अब साकार हो गया है। हालांकि इस पल के गवाह वो टीवी के माध्यम से बने। उन्हें भारतीय वायु सेना की ओर से इस कार्यक्रम में आने के लिए न्यौता मिला था। निजी कार्यक्रम की वजह से इसमें शामिल नहीं हो पाए।

दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड अंतर्गत पूर्वी एवं पश्चिमी कमला तटबंध के मध्य अवस्थित पूर्णतः बाढ़ ग्रस्त एक छोटे से गांव बाउर में 1946 में जन्मे डॉ मानस बिहारी वर्मा का भारत का तेज बढ़ाने वाली ‘तेजस’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मानस वर्मा की शुरूआती पढ़ाई लिखाई गांव के ही जवाहर हाइस्कूल, मधेपुर में ही हुई है। यहां से 10वीं पास कर पटना साइंस कॉलेज और बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज से उच्च और तकनीकी शिक्षा प्राप्त किया।

सागर विश्वविद्यालय से एमटेक की डिग्री प्राप्त करने के अपने ज्ञान और विज्ञान के बल देश सेवा में लीन हो गए। उनके द्वारा देशहित के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक सम्पादित किये गए लेकिन मिसाइलमैन के नाम से प्रसिद्ध पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के साथ किया गया ‘तेजस’ प्रोजेक्ट उन्हें भी आह्लादित और गौरवान्वित कर रहा है।

उन्हें यह बात अच्छी तरह से याद है कि 1986 में तेजस युद्धक विमान बनाने के लिये जो टीम गठित किया गया था उसमे लगभग 700 इंजीनियर शामिल किये गए थे। डॉ वर्मा इस टीम में बतौर मैनेजमेंट प्रोग्राम डारेक्टर के रूप में अपना योगदान दे रहे थे। उन्होंने बताया कि यह विमान डॉ कलाम की सोच था। 2005 में सेवनिवृति से पूर्व तक उन्होंने इस प्रोजेक्ट में महत्वपूर्ण भूमिका अदा किया है।

सेवानिवृति के बाद भी वो सुबह से शाम तक लोगों में विज्ञान के प्रति जागृति फ़ैलाने का काम कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में अवस्थित विद्यालयों में चलंत प्रयोगशाला से प्रायोगिक ज्ञान-प्रदान करना व व्याख्यान देना उनके रोजमर्रा का कार्य है। पूरा घनश्यामपुर प्रखंड अपने लाल के इस कामयाबी पर आज झूम रहा है।

ईनाडु इंडिया से बातचीत में मानस बिहारी वर्मा ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ कलाम साहेब ने इस प्रोजेक्ट की नींव रखी थी। 1986 में पहली बार इसकी नींव रखी गई थी। 1994 में कलाम साहेब इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर जनरल बनकर पूरी तरह से शामिल हुए थे। मानस वर्मा ने बताया कि इस कार्यक्रम में वे प्रोग्राम डायरेक्टर के तौर पर जुड़े थे।

वे तेजस के निर्माण मैकेनिकल विंग व डिजाइन को देखते थे। 2005 में रिटायर होने के बाद वे गांव में आकर युवाओं में साइंस के प्रति जागरुकता पैदा कर रहे हैं।

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