बिहार की होनहार बेटी जिसने अफ्रीका की सबसे बड़ी चोटी माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा लहराया और बिहार की पहली पर्वतारोही होने का गर्व हासिल किया, लेकिन आज कदम चंद पैसों के कारण लगभग रुक से गए हैं।

पटना कॉलेज की छात्रा मिताली प्रसाद को अगले महीने साउथ अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी एकांकागुआ की चढ़ाई करनी है पर पैसों के कारण उसके सपने दम तोड़ रहे है। छोटे से कद काठी की छात्रा मिताली प्रसाद जिसे किसी पहचान की जरूरत नहीं। मिताली प्रसाद ने 31 मार्च 2019 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो चोटी पर पताका पहराकर बिहार की पहली बेटी होने का गर्व हासिल किया था।

आज मिताली अपने सपने पूरे करने के लिए लोगों से पैसे मांग रही है। मिताली प्रसाद पटना विश्वविद्यालय की छात्रा है। उसने पटना विश्वविद्यालय से भूगोल विषय से एमए किया है। आज मिताली हर क्लास में जाकर अपने सपने बता रही है और दोस्तों से पैसे की मदद मांग रही है। मिताली बिहार की पहली पर्वतारोही है जिसने इतने कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मिताली की अगली मुहिम दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट एकांकागुआ है। माउंट एकांकागुआ एशिया से बाहर सबसे ऊंची पर्वत चोटी है जो इंडीज पर्वतमाला में स्थित है। मिताली को दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में इस मुहिम के लिए निकलना है पर पैसे की किल्लत ने कदम रोक दिया है।

मिताली को अगली मुहिम के लिए साढ़े छह लाख रुपये की जरूरत है पर मध्यम परिवार की माली हालत ने उसके हौसलों पर बेड़ियां लगा दी हैं। वो अपने सपने पूरे करने के लिए दोस्तों से मदद मांग रही है पर इतनी बड़ी रकम इकठ्ठा करना मुश्किल हो रहा है। मिताली के राह में मुश्किलें बहुत ही पर मिताली के हौसले टूटे नहीं हैं। मिताली हर दिन सुबह घर से निकलकर सभी कॉलेजो में छात्रों के बीच जाती है। छात्रों से मिलकर अपने सपने बताती है और मदद की गुहार लगा रही है। मिताली की इस मुहिम में उसके दोस्त भी बढ़ चढ़कर मदद कर रहे है। हर क्लास हर कॉलेज में साथ जाकर पैसे इक्कठा करने में मदद कर रहे हैं। जो भी छात्र जितनी मदद दे सकता है वो मदद कर रहा है।

20 रुपये से लेकर 200 रुपय तक हर छात्र अपनी पॉकिट मनी मिताली के लिए खर्च कर रहा।मिताली के सपने को सच करने के लिए सभी छात्र हर दिन कैम्पेनिंग रहे हैं। मिताली अगर एकांकागुआ पर चढ़ाई करती है तो पूरे कॉलेज का नाम रौशन होगा।दूसरी दोस्त प्राची वर्मा ने तो मिताली के लिए ऑनलाइन कैम्पेनिंग चला रखी है। जो दोस्त ऑनलाइन मदद करना चाहते है उसे भी ऑप्शन दिया गया है। दोस्तों से मदद मांगना और एक-एक पैसे का हिसाब रखने की जिम्मेदारी मिताली के दोस्त उठा रहे हैं।

सरकार से गुहार लगाना भी गया बेकार

मिताली ने मदद के लिए बिहार सरकार के कला संस्कृति और युवा विभाग के पास चिट्ठी भी लिखी पर आजतक कोई जबाब नहीं आया है। मिताली ने सरकार से उम्मीद छोड़ दी है अब खुद और दोस्तों के भरोसे पैसे जुटाने में लगी है। मिताली कहती हैं कि इससे पहले किलिमंजारो पर्वत पर जाने से पहले भी सरकार से मदद मांगी थी पर कोई मदद नहीं मिली। आज फिर मदद के लिए पत्र लिखा है पर कोई जबाब नही मिला है। पटना विश्वविदयालय के प्रोफेसर ने भी सरकार से मिताली को मदद करने की गुहार लगाते हुए कहती है कि सरकार के विभाग ऐसे बच्चो के लिए काम नही करेगी तो कब करेगी।

मिताली अपने इस मुहिम के लिए मदद की गुहार लगा रही है। पटना की इस बेटी के लिए अगर आप मदद करना चाहते हैं तो आप भी आगे आइये ताकि आपकी एक मदद मिताली के सपने को पूरा कर सकता है। आप मिताली के इस अकाउंट में पैसे भेजकर उसकी मदद कर सकते हैं।

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