छठ पर बिहारी औरतों को पिछड़ा कहने वालों को, इस बिहारी साहित्यकार ने दिया है मुंहतोड़ जवाब

खबरें बिहार की

पटना: छठ के कुछ दिन पहले से ही बिहार वासी अपने इस लोकआस्था का महापर्व की अहमियत लोगों से साझा करते हैं. जब से सोशल मीडिया आई है वो इसके माध्यम से अपनी संस्कृति के बारे में लोगों को बताते हैं कि छठ का क्या मायने होता है हमारे लिये. यह हम दूसरों को दिखाने के लिये नहीं खुद उसमें डूब जाने के लिये करते हैं.

लेकिन इस बार फ़ेसबुक पर कुछ लोग हमारे छठ को अतिरेक बताते नज़र आये कि हम जानबूझकर इसका प्रचार प्रसार करते हैं. उन्होंने छठ पर तो कमेंट किये ही और साथ ही बिहारी औरतों के सिंदूर पर भी. उनलोगों ने बिहारी औरतें जो छठ के दिन नाक से मांग तक सिंदूर करती हैं उन्हें पिछड़ा बताया. इसपर बिहार के लोगों की प्रतिक्रिया से दो-तीन दिन फ़ेसबुक गरम रहा.

“डार्क हॉर्स” के लेखक और लोकगीतों के उभरते गायक नीलोत्पल मृणाल ने इसपर जो कहा वो किसी भी बिहारी का दिल जीत ले सकता है. लोकआस्था का महापर्व छठ मूल रूप से बिहार, झारखंड और यूपी का ही है. इसलिये छठ गीतों का महत्व भी यहाँ उतना ही बड़ा है. नीलोत्पल को अपनी पुस्तक डार्क हॉर्स के लिये युवा साहित्य अकादमी पुरष्कार भी मिला है.

Leave a Reply

Your email address will not be published.