आपने ईमानदारी के कई किस्‍से सुने होंगे लेकिन एक ऐसे शख्‍स से मिलवाते हैं जिसने ईमानदारी की मिसाल कायम की है.

‘भाई साहब ईमानदारी का तो जमाना ही नहीं रहा’ – ये लाइन आप और हम दिन में एक न एक बार तो सुन ही लेते हैं. हर दिन अखबार, टीवी और अपने आसपास ऐसी कई घटनाओं को होते देखते हैं जिसके बाद ये बात स्वाभाविक तौर पर मुंह से निकल आती है. लेकिन सच तो ये है कि दुनिया अभी भी इतनी बुरी नहीं हुई है कि हम एक दूसरे पर विश्वास करना छोड़ दें.

बिहार के रहने वाले देबेंद्र कापड़ी, 24 साल के हैं और दिल्ली में टैक्सी चलाते हैं. टैक्‍सी ड्राइवर देबेंद्र कापड़ी चाहते तो मिले हुए लाखों रुपये से अपने घर के कर्ज चुका सकते थे, लेकिन ऐसा करने के बजाय उन्‍होंने 8 लाख रुपयों से भरा बैग उसके मालिक तक पहुंचाने के लिए पूरा दम लगा दिया. और आखिरकार वह बैग उस व्‍यक्ति तक पहुंच भी गया.

News18 hindi को कश्‍मीर में रहने वाले मुबिशेर अहमद वानी ने बताया कि ऐसी ईमानदारी बहुत कम ही देखने को मिलती है. देबेंद्र बहुत ईमानदार हैं. जब टैक्‍सी छोड़ दी थी, तो एक बार को लगा कि पैसे नहीं मिलेंगे, लेकिन प्रीपेड होने के कारण संपर्क किया तो देबेंद्र की ईमानदारी से सामना हुआ.

अपनी बात पूरी करते हुए देबेंद्र ने बताया कि पुलिस ने बैग का सारा सामान देखा और उसकी लिस्ट बनाने लगे. उसमें करीब 70 डॉलर भी रखे हुए थे. इसके अलावा सोने के गहने, लैपटॉप, आईफोन भी उस बैग में था.

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