बिहारी स्‍वाभिमान जगाती यहां की मिट्टी, जानिए बुद्ध-महावीर से चंद्रगुप्‍त-अशोक व माउंटनमैन तक की कहानियां

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 ‘बिहार में का बा?’ – इस सवाल के दौर में बिहारी मान-सम्मान और स्वाभिमान की ख्याति पूरी दुनिया में फैलाने का माध्‍यम बने बिहार दिवस का आयोजन जरूरी हो जाता है। पहली बार 2010 में ‘बिहार दिवस’ के आयोजन से यहां की माटी (मिट्टी) की खुशबू सात समंदर पार तक फैली। इसे बिहार ही नहीं, दुनिया भर के बिहारियों का समर्थन व सहयोग मिला। कोरोना संक्रमण के कारण बीते दो सालों से इसपर ग्रहण लग गया था, लेकिन इस साल एक बार फिर बिहार अपने गौरव से दुनिया को अवगत करा रहा है।

बुद्ध की ज्ञानभूमि बिहार, बोधिवृक्ष की होती है पूजा  

बिहार की भूमि में सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ। बोधगया की निरंजना नदी के तट पर कठोर तपस्या के बाद उन्‍हें जिस पीपल पेड़ के नीचे ज्ञान मिला, वह आज भी बोधि वृक्ष के नाम से पूजा जाता है।

24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्मभूमि है बिहार  

बिहार के वैशाली के कुंडलपुर गांव को जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की पवित्र जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। अहिंसा और सत्य का ज्ञान पूरी दुनिया में फैलाने वाले भगवान महावीर की मोक्ष भूमि भी बिहार के ही पावापुरी में है।

बिहार महान खगोलशास्त्री व गणितज्ञ आर्यभट्ट की भूमि

गणित व खगोल विज्ञान की चर्चा हो और आर्यभट्ट का नाम नहीं आए, ऐसा नहीं हो सकता है। बिहार में जन्मे आर्यभट्ट ने नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ाई की। खगोल विज्ञान, गोलीय त्रिकोणमिति, अंकगणित, बीजगणित सहित गणित व खगोल विज्ञान के ढेर सारे आविष्कारों को आर्यभट्ट ने बिहार की धरती से पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

चाणक्‍य ने नंद वंश का नाश कर चंद्रगुप्‍त को बनाया सम्राट

एक दौर था, जब बिहार का अर्थ भारत हुआ करता था। पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) पूरे देश की राजधानी था। प्राचीन भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण और शक्तिशाली राजा माने जाने वाले चंद्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य का सूत्रपात बिहार के पाटलिपुत्र की धरती से ही हुआ था। नंद वंश का नाश करने का संकल्प लेकर चंद्रगुप्त को शासन की बागडोर तक पहुंचाने वाले आचार्य चाणक्य की भूमि होने का गौरव भी बिहार को ही है।

महान सम्राट अशोक की राजधानी रहा पाटलिपुत्र  

मौर्य साम्राज्‍य के सम्राट अशोक ने में विश्‍व को अहिंसा का संदेश दिया। भारत सहित वर्तमान पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार तक अशोक का साम्राज्‍य फैला था। कहा जाता है यह उस समय से आज तक का सबसे विशाल साम्राज्य था। पाटलिपुत्र उस विशाल साम्राज्‍य की राजधानी था।

अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले बाबू कुंवर सिंह की धरती

आजादी कर पहली लड़ाई में बिहार के योगदान की चर्चा के दौरान बाबू कुंवर सिंह याद आते हैं। उनकी जन्मभूमि भी बिहार के भोजपुर का जगदीशपुर गांव था। उन्‍होंने 80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के दांत खट्टे करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों की फौज के छक्के छुड़ाने वाले कुंवर सिंह ने अंग्रेजों की गोली लगने के बाद खुद ही अपनी तलवार से अपने घायल हाथ को काट डाला था।

अकेले चीर दिया पहाड़ का सीना, बना दिया पइन

अब अतीत से वर्तमान की ओर आएं तो बिहार में पहाड़ों का सीना चीरकर रास्ते बनाने का दम भी है। माउंटेनमैन के नाम से चर्चित हुए दशरथ मांझी बिहार के गया के गहलौर गांव के थे। केवल एक हथौड़े और छेनी के बल पर अकेले ही उन्होंने 360 फीट लंबे, 30 फीट चौड़े और 25 फीट ऊंचे पहाड़ को काटकर सड़क बना डाली।माउंटनमैन की तरह ही गया के लौंगी भुइयां ने 20 वर्षों में अकेले करीब पांच किलोमीटर लंबे पईन का निर्माण कर दिया। इससे आज सैकड़ों एकड़ खेतों की सिंचाई की जा रही है।

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