गरीबी, कामयाबी की राह में रोड़ा नहीं बन सकती। अपनी काबिलियत से इंसान तकदीर की लकीरों को बदल सकता है। मोबसार जावेद अकबर एक ऐसे ही इंसान हैं। उनके दादा बिहार के थे और कोलकाता में जूट मिल मजदूर थे। लेकिन मोबसार के इरादों पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने कोलकाता के ऐतिहासिक प्रेसिडेंसी कॉलेज से पढ़ाई की। धुआंधार अंग्रेजी बोलने और लिखने वाले मोबसार कई मुकाम बनाने के बाद अब केन्द्र सरकार में मंत्री हैं। हम सब इन्हें एम जे अकबर के नाम से जानते हैं।

अकबर का जन्म पश्चिम बंगाल के तालिनीपारा में हुआ था। उनके दादा का हिन्दू थे जिनका नाम प्रयाग था। प्रयाग बिहार के रहने वाले थे और रोजगार के लिए कोलकाता गये थे। दंगों के बाद बचपन में उनकी देखभाल एक मुस्लिम दम्पति ने की थी। वे उन्हें ही माता पिता मामने लगे। बाद में प्रयाग ने मुस्लिम धर्म स्वीकर कर लिया और उनका नाम रहमतुल्ला हो गया। अकबर ने अपनी किताब- ब्लड ब्रदर्स- ए फैमिली सेगा- में इस बात का जिक्र भी किया है। अकबर के दादा कोलकाता के नजदीक चंदननगर के तेलिनपारा जूट मिल में मजदूर थे।

एम जे अकबर यानी  मोबसार जावेद अकबर का जन्म तेलिनीपारा में ही हुआ था। अकबर शुरू से पढ़ने में तेज थे। ऐतिहासिक प्रेसिडेंसी कॉलेज से उन्होंने अंग्रेजी में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद एक पत्रकार के रूप में करियर शुरू किया। 1971 में उन्होंने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में ट्रेनी जर्नलिस्ट के रूप में काम शुरू किया। इसके बाद वे लगातार आगे बढ़ते गये। इलस्ट्रेड विकली, आनंद बाजार पत्रिका, टेलीग्राफ में भी रहे। फिर वे ‘द एशियन एज’ अखबार के संस्थापक संपादक बने। अंग्रेजी इंडिया टुडे के एडिटोरियल डायरेक्टर रहे। उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं। एक विद्वान पत्रकार के रूप में उनकी पहचान है।

एम जे अकबर ने 1989 में राजनीति का रुख किया। वे कांग्रेस के टिकट पर बिहार के किशनगंज से लोकसभा का सदस्य चुने गये। उससे पहले ये तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रवक्ता थे। पत्रकारिता और राजनीति साथ- साथ चलती रही। राष्ट्रीय राजनीति में जब नरेन्द्र मोदी का मजबूती से उदय हुआ तो एम जे अकबर के राजनीतिक विचार भी बदल गये। कांग्रेसी सोच वाले अकबर, नरेन्द्र मोदी के प्रशंसक हो गये।

2014 में एम जे अकबर भाजपा में शामिल हो गये। अकबर की राजनीतिक विद्ववता को भाजपा ने भी तरजीह दी। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया। भाजपा ने 2015 में अकबर को झारखंड से राज्यसभा का सदस्य बनाया। जुलाई 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें मंत्रिपरिषद में शामिल कर उनकी योग्यता को सम्मान दिया। एम जे अकबर अब भारत के विदेश राज्यमंत्री हैं।

अकबर के भाजपा में शामिल होने और मोदी मंत्रिपरिषद में मंत्री बनने पर बहुत सवाल भी उठे। 2002 के गुजरात दंगे के खिलाफ अकबर ने एक पत्रकार के रूप में जोरदार कलम चलायी थी। 30 से कम उम्र में ही वे टेलीग्राफ जैसे अखबार के संपादक बन गये थे। उनसे सवाल पूछा जाने लगा कि जिस नरेन्द्र मोदी के वे आलोचक थे उनके भक्त कैसे बन गये। लेकिन अकबर ने इन आलोचनाओं को दरकिनार कर दिया। आज वे नरेन्द्र मोदी के विश्वसनीय मंत्रियों में एक हैं।

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