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आज हम बिहार के एक ऐसे युवक के बारे में बता रहे जिसने बुरी से बुरी परिस्थिति में भी हार नहीं माना। खुद पे भरोसा और धैर्य के साथ आज जीवन में वो मुकाम हासिल कर रहे जिसके बारे में कभी नही सोचा था। दसवीं के बाद आगे पढ़ाने के लिए रोहित के पिता के पास पैसे नहीं थे। किसी तरह जुगाड़ करके ट्यूशन शुरू करवाया, लेकिन पैसों की कमी के चलते ग्यारहवीं की परीक्षा से पहले ही ट्यूशन भी छोड़ना पड़ा। किसी तरह रोहित ने बारहवीं की परीक्षा पास की। सारे दोस्त आगे की पढाई करने या तो दिल्ली, मुम्बई, बैंगलोर या किसी और शहर में चले गए। और रोहित ने अपने पिता की आर्थिक मदद करने के लिए पटना में एयरटेल में डाटा एंट्री की छोटी सी जॉब करने लगे।

माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल पे अच्छी पकड़ थी, इसलिए एक महीने में ही टीम-लीडर बना दिए गए। सैलरी बहुत कम थी तो कुछ नया सीखने के लिए कॉल सेंटर में काम करने लगे। फिर 8 महीने ही हुए थे की कॉल सेंटर बंद हो गई और उसके साथ उनकी नौकरी भी चली गई।




 

ज़िन्दगी बहुत ही बुरे दौर से गुज़र ही रही थी की एयरटेल के लिए फील्ड अफसर का काम मिल गया। कहने को तो जॉब- प्रोफाइल में अफसर लगा होता है, पर जून की जलती धुप में रिचार्ज बेचने दिन भर बाहर रहना पड़ता था। फिर एक दिन पता चल की होटल सिटी सेंटर में रिसेप्शनिस्ट की जॉब के लिए इंटरव्यू चल रहा, तो रोहित भी अपनी किस्मत आजमाने पहुँच गया। कोशिश रंग लाई और फिर छह महीने में ही प्रमोशन मिला और उन्हें बिज़नस डेवलपमेंट मेनेजर बना दिया गया।

बाहरवीं के बाद आगे पढ़ने की चाहत पीछे ही रह गई। आमदनी थोड़ी अच्छी हो रही थी और साथ ही परिवार में सभी खुश थे काम के सिलसिले में काफी ट्रेवल करना पड़ता था। फोटोग्राफी के शौक़ीन रोहित ने अपने कमाए हुए पैसों से एक छोटा से निकोन का कूल-पिक्स कैमरा लिया था और जब भी मौका मिलता, पटना, बोध गया, राजगीर , नालंदा के स्ट्रीट्स की खूबसूरती को अपने कैमरे में कैद कर लेते। उसी वक्त पटना के मशहूर फोटोग्रफेर, सौरव अनुराज के बारे में सुना। उनके काम को देखा और उनके बारे में जाना तो इंस्पिरेशन मिली।




रोहित कहते हैं की उन्हें आज भी याद है अप्रैल 2015 का वो दिन जब मैं एक दसलर कैमरा खरीदने का निश्चय किया। उस वक्त सौरव अनुराज से रोहित ने सेकंड- हैण्ड कैमरा ख़रीदा, DSLR Nikon d5100, रोहित रॉय का पहला DSLR कैमरा। रोहित कहते हैं, “वो कैमरा सौरव भैया का लकी कैमरा था और मेरे के लिए भी लकी साबित हुआ।”

2015 से 2016 तक स्ट्रीट फोटोग्राफी किया और समाज के उन लोगों की तसवीरें इकठ्ठा की जिन्हें समाज में वो मान-सम्मान नहीं मिला जिनके वो हकदार हैं।

2016 में रोहित ने वाउ स्टूडियो की शुरुआत किया। फोटोग्राफी आर्ट को प्रमोट करने के लिए और समाज के वंचितों के लिए बहुत सारे फोटोवॉक और डोनेशन कैंप भी आयोजित किये जो बहुत सफल रहा। #HarmodpebachpanBiktahai कैंपेन की भी शुरुआत की। वाउ स्टूडियो को पटना के टॉप 5 फोटो-स्टूडियो में जगह मिली एयर साथ ही लोगों का ढेर सारा प्यार और सम्मान मिला।



रोहित कहते हैं, “शुरुआत में पटना में फोटोग्राफी करना बड़ा मुश्किल था। लेकिन अब धीरे चीज़ें बदल रही हैं।”

वह ऑफिस जहाँ वह एक साल काम किये स्टाफ की तरह , आज उसी ऑफिस को उन्होंने खरीद कर अपना ऑफिस बना रखा है|डाटा एंट्री, कॉल सेंटर, फील्ड जॉब से लेकर एक सफल फोटोग्राफी बिज़नस खड़ा करने तक का सफर तय करने वाले रोहित समाज के उन तमाम युवकों के लिए एक मिसाल और प्रेरणा हैं।

रोहित रॉय कहते हैं, “मेरे गुरु जी कहते थे, सबका दिन आता है, पर मेरा ज़माना आएगा। शायद सच ही कहते थे।”

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