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सबकुछ खो जाने पर और कुछ खोने की आशा नहीं रहती, लेकिन बहुत कुछ पाने की उम्मीद भी जगा देती है। शून्य से शिखर तक का रास्ता तय करने वाली कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार के एक नौजवान की जिसने अपनी ज़िद्द और हिम्मत के साथ हालात से लड़कर कामयाबी की बुलंदियों को छुआ।

कभी जेब में बस 250 रुपये होने पर भी हिम्मत नहीं हारा और सपनों को पूरा करने के लिए दिल्ली गये। फिर वहां हालातों का सामना कर कड़ी मेहनत के बदौलत 21 साल की उम्र में खुद की आइटी कंपनी की शुरुआत की। आज उनकी कंपनी का सालाना टर्न ओवर 150 करोड़ रुपये है और 200 कर्मचारी काम कर रहे।

 

सफलता की ये कहानी है अररिया के फारबिसगंज के पास मिर्दुअल गाँव में जन्में किसान पुत्र अमित दास की। घर परिवार चलाने के लिए अमित के पिता खेती करते थे और उनके भाई भी पिता की मदद करते थे। पर अमित को ये मंजूर नहीं था। वो तो इंजीनियर बनना चाहते थे।

घर में पैसे की तंगी से भली भांति परिचित अमित, पटना से 12 वीं पास करने के बाद समझ गये कि उनके परिवार के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई का खर्च उठाना मुमकिन नहीं है।

खेती करना नहीं चाहते थे और कमाने के लिए कभी दुकान खोलने की बात मन में आती तो कभी और धंधा शुरू करने की बात सोचते। और फिर एक दिन इन विचारों को अमित ने दरकिनार कर पढ़ाई करके ही कुछ करने का फैसला किया।

अमित ने सोचा की दिल्ली में ही कुछ कर लेंगे। जेब में केवल 250 रुपये के साथ एक दिन वे दिल्ली के लिए निकल दिए। पटना से दिल्ली पहुँचते ही पहली ठोकर लगी। कुछ काम कर के थोड़े पैसे जोड़े और कम्प्यूटर कोर्स में एडमिशन के लिए अप्लाई किया। अंग्रेजी कमजोर होने की वजह से एडमिशन नहीं हुआ। एक 17 साल के लड़के लिए काफी कठिन हालात थे।

अमित को चारों और अँधेरा दिखने लगा। फिर एक दिन बस में सफर के दौरान किसी ने इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स ज्वाइन करने की सलाह दी। कोर्स पूरा करने के बाद अमित में आत्मविश्वास जगा की वह अंग्रेजी बोल व पढ़ भी सकते हैं।

अमित ने छह महीने के एक कम्प्यूटर कोर्स में एडमिशन लिया। कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा का रिजल्ट आया तो अमित ने टॉप किया था। संस्थान ने खुश होकर अमित को तीन साल का एडवांस कम्प्यूटर कोर्स ऑफर किया। और बेहतर रिजल्ट आने पर अमित को फैकल्टी बना दिया।

नौकरी छोड़ कर 21 साल की उम्र में अमित दास ने ‘आइसॉफ्ट’ के नाम से एक कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर कंपनी की शुरुआत की। शुरू में काफी स्ट्रगल करने के बाद प्रोजेक्ट मिलने लगे।
 2006 में आस्ट्रेलिया में आयोजित एक सॉफ्टवेयर फेयर में भाग लेने लेने के बाद अमित को को एहसास हुआ कि उसके काम की तारीफ हो वहां भी हो सकती है। फिर आस्ट्रेलिया में भी एक ऑफिस खोल कर अपना काम बढ़ाते गए। फिर दुबई समेत भारत में दो जगह और ऑफिस खोलना पड़ा। अब अमित की 150 करोड़ की सालाना टर्नओवर वाली कंपनी में 200 से अधिक लोग काम कर रहे हैं।