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राष्ट्रप्रेम को ही सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रेम माना गया है। भारत के महान संत अब्दुल कलाम साहब इस बात के सबसे बड़े साक्ष्य है। जिन्होंने देश प्रेम के कारण ही अपने जन्मभूमि में ही सारा जीवन यापन करके ऐसी मिसालें पेश की उनका जीवन दूसरों के लिए एक आदर्श बन गया।

उनके आदर्शों को ही मानने वाले युवकों में से तीन युवक ने अपने जन्मभूमि के लिए कुछ करने की ठानी और अपनी-अपनी नौकरियाँ और व्यवसाय को छोड़ कर समस्तीपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ब्लॉक “रोसड़ा” में ऐसी संस्थान की नींव रखी जो गरीब बच्चों की प्रतिभा को तराश कर उन्हें उनकी मंजिल तक पहुँचा सकें।

इस शैक्षणिक संस्थान की नींव रखने वाले अनिषेक सिंह ने बताया कि उन्हें बहुत आत्मग्लानि होती थी जब वो देखते थे की बच्चें सही जानकारी और मार्गदर्शन के अभाव में सरकारी नौकरी से वंचित रह जाते थे। उन्हें और भी दुःख तब होता था जब वो  कोचिंग संस्थानों के द्वारा गरीब बच्चों का शोषण होता देखते थे

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ऐ.पी.जे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानने वाले अनिषेक सिंह ये देखकर बिल्कुल उखड़ से गये और उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए कुछ करने की ठानी लेकिन जैसा कि कहावत प्रचलित है “अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता” इसलिए उन्होंने दिल्ली में ही रहते समय ही ऐसे लोगों की तलाश शुरू की जो उनकी इस मुहिम में उनका साथ दे सकें।

 

इस खोज के दौरान उनकी मुलाकात दिल्ली में ही एक प्रतिटिसिथ संस्थान में पढ़ा रहे है रोसड़ा के ही निवासी “आलोक कुमार” से हुई। आलोक कुमार ने आगे बताया कि वो दिल्ली में इतने बड़े इंस्टिट्यूट में पढ़ा तो रहे थे लेकिन उनके अंदर कही ना कही बैचैनी सी थी और छटपटाहट भी थी अपने क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ गरीब बच्चों  को  भी आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अनिषेक सिंह के विचारों पर सहमति देकर अगले ही दिन अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

आलोक कुमार आगे बताते है कि आगे की राह इतनी आसान नहीं थी लोग उनके मंशा पर सवाल उठाने लगे और उनके इस सपने का मज़ाक उड़ाने लगे।

लेकिन फिर भी वो अपने फैसले पर अड़े रहे…

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अनिषेक सिंह और आलोक कुमार के इस सोच को देख कर एक व्यक्ति और इनके सहयोग में आ गये। बहुत से बच्चों को एसएससी में जाने का सपना पूरा करवाने वाले  विनीत वैभव”।

विनीत वैभव बताते है कि वो हमेशा से समाज के लिए कुछ ना कुछ करना चाहते थे लेकिन शुरुआत कैसे करें ये समझ में नहीं आ रहा था। लेकिन उनदोनों लोगों से मिलकर ये भी बहुत ज्यादा प्रोत्साहित हुए और इन तीनों ने मिलकर स्थापना की “न्यू पैरामाउंट क्लासेज” की जिसमें वो गरीब बच्चों को निःशुल्क में स्टडी मैटेरियल के साथ-साथ सरकारी नौकरी की तैयारी भी करवाते  है और बदलते समय और पाठ्यक्रम के साथ साथ नवीनतम और सुलभ तरीके समझाते है।

इनलोगों का ये जज्बा देखकर इनके साथ जुड़े बीपीएससी को पहली बार में ही बिना कोई कोचिंग के सहायता से क्रैक करने वाले “स्वास्तिक मिश्रा” जो बच्चों को सामान्य ज्ञान की शिक्षा देते है।

विनीत वैभव ने हमें बताया कि कोचिंग स्थापना के चंद महीनों में ही एक नई उच्चाई को प्राप्त कर लिया है। गरीब और कमजोर बच्चों के लिए वे लोग पूरा समय देते है ताकि वो भी इस कम्पटीशन के दुनिया में अपने आप को अकेला नहीं पायें।

आलोक कुमार बताते है जरूरतमंद बच्चों के लिए संस्थान की तरफ से जल्द ही बुक बैंक खोला जा रहा है जिसमें पहली कक्षा से लेकर कम्पटीशन लेवल की किताबें उपलब्ध रहेगी । जिससे जरूरतमंद बच्चें निःशुल्क में किताबें प्राप्त कर सकते है।

 

 

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अनिषेक सिंह ने कोचिंग के बारे में बताया की संस्थान में गरीब बच्चें की शिक्षा निःशुल्क है परंतु समर्थवान से वो न्यूनतम शुल्क लेकर कोचिंग के रख-रखाव का खर्च निकालते है। संस्थान में पढ़ाई के साथ साथ लोगों जागरूक करने के लिए समय-समय पर नुक्कड़ नाटक और रैली का आयोजन भी होता है।

 

बात करें कोचिंग की सफलता के बारे में तो अन्य कोचिंग जहाँ चार सालों से इक्का दुक्का रिजल्ट दे रहे है लेकिन ये संस्थान की स्थापना हुए चंद महीने ही हुआ है और इस संस्था से 6 बच्चें बैंक में अपना परचम लहरा चुके है।

इसे एक समाज में भी बहुत बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। लोगों ने भी इसे सकरात्मक रूप से लिया है और इसकी प्रशंसा रोसड़ा और उसके आसपास के क्षेत्रों में होने लगी है इसलिये 10-10 किलोमीटर दूर से भी लड़कियों यहाँ पढ़ने आने लगी है।
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इस संस्थान बारे में जब हमने वहाँ के स्थानीय निवासी सुधांशु शुभम से पूछा तो उनका कहना था कि युवाओं को अपनी मिट्टी से लगाव होनी चाहिए बाकी कर्म करने पर अच्छे फल तो मिलेंगे ही।
ये संस्थान उन सभी लोगों को आइना दिखाता है जिन्हें बिहारी होने पर शर्म महसूस होती है और वो बाहर रहने के बाद अपने घर और गाँव को भूल जाते है।

ये संस्थान वाकई में एक उदाहरण है माटी-प्रेम का और तमाचा है उनलोगों के मुंह पर जिन्हें लगता है गाँव के में पर प्रतिभा की कमी होती है या वो जिंदगी में कुछ कर नहीं सकते है।

 

ऐसे ही युवाओं के जज्बे को सभी सलाम करते है और उनके सुंदर भविष्य के लिए कामना करते है।

 

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