बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन : लोकसेवा में ऑनलाइन आवेदन तो मजबूरी, ऑफलाइन लेने में बखेड़ा, आयुक्त को लिखा पत्र

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राज्य सरकार की ओर से आम नागरिकों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लोक सेवाओं के तहत कुछ अधिकार दिए गए हैं। लोगों को नि:शुल्क सुविधाएं प्रदान की जानी है। हाल में ही जब इसकी समीक्षा की गई तो यह पाया गया कि लोक सेवा केंद्र पर कार्यरत कर्मचारी ऑनलाइन आवेदन आने पर तो कार्रवाई करते हैं, लेकिन जब कोई व्यक्ति ऑफलाइन आवेदन देने जाता है तो उसे अनर्गल सलाह देकर लौटा दिया जाता है।

इस अधिनियम के तहत ऑफलाइन आवेदन को कार्यपालक सहायक और आईटी सहायक द्वारा प्राप्त कर उसे पोर्टल पर अपलोड किया जाना है। आवेदक को पावती रसीद भी देनी है। कर्मचारी ऐसा नहीं करते। इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव ने भी नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त व जिलाधिकारी को समय-समय पर इसकी जांच करने का निर्देश दिया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार बांका में नवंबर माह तक 41,411 ऑनलाइन आवेदन लिए गए, जबकि ऑफलाइन आवेदनों की संख्या 656 ही रही। अररिया में 38,502 ऑनलाइन आवेदन दिए गए। यहां ऑफलाइन आवेदनों की संख्या 409 ही दर्ज की गई है। किशनगंज में 17,494 ऑनलाइन, जबकि 147 ऑफलाइन आवेदन लिए गए। मुंगेर में ऑनलाइन आवेदन 35,588, जबकि ऑफलाइन आवेदन 3248 ही दर्ज हैं।

पूर्णिया में ऑनलाइन आवेदन 29,116, जबकि 993 ऑफलाइन आवेदन जमा किए गए। इसी प्रकार सहरसा में 32,698 ऑनलाइन व 1611 ऑफलाइन आवेदन दर्ज किए गए हैं। पूरे राज्य की यही स्थिति है। कहीं 0.98 प्रतिशत तो कहीं 2.11 प्रतिशत ऑफलाइन आवेदन लिए गए। सबसे अधिक ऑफलाइन आवेदनों का निष्पादन सुपौल में किया गया। सबसे कम आंकड़ा रोहतास का है।

ऑफलाइन आवेदन नहीं लिए जाने से लोगों को परेशानी हो रही है। जो कम पढ़े-लिखे लोग हैं, उन्हें साइबर कैफे से ही दलाल अपनी चंगुल में फंसाने का प्रयास करता है। बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन की अपर निदेशक डॉ. प्रतिमा और मुख्य सचिव की नाराजगी के बाद प्रशासनिक सक्रियता बढ़ी है।

 

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