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दुनिया के इन देशों के राष्ट्रप्रमुख पदों पर रहे Bihar के लोग

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नेपाल से लेकर मॉरीशस तक Bihar के लोग ने विदेश पर ऐसे किया राज, जानकर आपको होगा गौरव

मॉरिशस में भी भारतीय मूल के राजकेश्वर कैलाश पुर्याग देश के प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, जिनका ताल्लुक Bihar से है।

कई भारतीय देश से बाहर निकलकर दूसरे देशों में राष्ट्रप्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं या संभाल चुके हैं। आयरलैंड में इस वक्त भारतीय मूल के डॉक्टर लियो वरदकर देश के प्रधानमंत्री हैं, इनका ताल्लुक मुंबई से है।

फिजी लेबर पार्टी के नेता महेंद्र पाल चौधरी मई 1999 में फिजी के पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। हालांकि ठीक एक साल बाद ही उन्हें और उनके मंत्रियों को देश के बागी नेता जार्ज स्पीट ने बंधक बना लिया था। इस तख्तापलट के बाद 56 दिन तक उन्हें कैद में रहना पड़ा और पद छोड़ना पड़ा।




पीएम बनने से पहले ऑडिटर के तौर पर काम करने वाले महेंद्र का ताल्लुक हरियाणा राज्य से हैं। उनके दादा 1912 में हरियाणा से फिजी गए थे और वहां गन्ने के खेत में उन्होंने मजदूरी की। महेंद्र 1997 में हरियाणा के बहुजमालपार गांव में रह रहने वाली अपनी बहन से मिलने भी आए थे।

भारतीय मूल के राजकेश्वर कैलाश पुर्याग ने जुलाई 2012 में मॉरिशस के पांचवें प्रेसिडेंट की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने भारतीय मूल के ही अनिरुद्ध जगन्नाथ की जगह पर ये पद संभाला था। इससे पहले 1973 में वो अटॉर्नी एट लॉ की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, जिसके बाद वो राजनीति में उतरे।




राजकेश्वर की पैदाइश भले ही मॉरिशस की हो, लेकिन उसका ताल्लुक Bihar के गया शहर से है। प्रेसिडेंट रहते हुए 2013 में जब वो प्रवासी भारतीय दिवस पर चीफ गेस्ट बनकर आए थे, तब वो अपने गया शहर भी गए थी। राजकेश्वर को लता मंगेश्कर के गाने सुनना पसंद है।

भारतीय मूल के भरत जगदेव अगस्त 1999 से दिसंबर 2011 तक गुयाना के प्रेसिडेंट रहे। उन्होंने 13 साल की उम्र में पीपुल्स प्रोग्रेसिव पार्टी की यूथ विंग ज्वाइन की थी। उन्होंने मॉस्को की यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर डिग्री ले रखी है। इसके बाद गुयाना में उन्होंने स्टेट प्लानिंग सेक्रेट्रिएट में इकोनॉमिस्ट के तौर पर काम किया। वो 1990 में देश के फाइनेंस मिनिस्टर भी रहे।




आरयलैंड के हेल्थ मिनिस्टर और इंडियन मूल के डॉक्टर लियो वरदकर आयरलैंड के प्रधानमंत्री हैं। गे नेता लियो की जड़ें मुंबई से जुड़ी हुई हैं। उनकी फैमिली के 60 मेंबर अब भी महाराष्ट्र में रहते हैं। 38 साल के लियो पिता अशोक वरदकर के सबसे छोटे बेटे हैं। अशोक 1960 के दशक में इंग्लैंड के नेशनल हेल्थ सर्विस में काम करते थे।

यहीं पर उनकी मुलाकात एक नर्स से हुई और दोनों ने बाद में शादी कर ली थी। वरदकर राजनीति में आने से पहले एक डॉक्टर थे। 2007 में वो सांसद चुने गए।




जब उन्होंने ‘गे’ होने की बात कबूली तो उनके पिता को बड़ी हैरानी हुई थी। भारतीय मूल के एंटोनियो कोस्टा नवंबर 2015 में पुर्तगाल के प्रधानमंत्री बने। सोशलिस्ट पार्टी के लीडर 55 साल के एंटोनिया गोवा में पणजी से 35 किलोमीटर दूर मड़गांव से रहने वाले हैं। उनके पिता ऑरलैंडो जाने माने साहित्यकार थे।




वो 18 साल की उम्र में गोवा छोड़ लिस्बन में जा बसे, जो पुर्तगाल के उपनिवेश वाला इलाका था।पुर्तगाली भाषा में उन्होंने ‘शाइन ऑफ एंगर’ नाम की मशहूर किताब लिखी थी। इस साल जनवरी में एंटोनियो भारत के दौरे पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मड़गांव में अपने 200 साल पुराने पैतृक घर में भी फैमिली के साथ वक्त बिताया।

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