बिहार में सूखे से बिगड़ते हालात, रोजी-रोटी के संकट के बीच मजदूरों का दूसरे राज्यों में पलायन शुरू

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बिहार में इस मॉनसूनी सीजन कम बारिश की वजह से सूखे के हालात पैदा हो गए हैं। किसानों की धान समेत खरीफ की फसल प्रभावित हुई है। इससे किसानों और खेतीहर मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। ऐसे में पटना से मजदूरों ने दूसरे राज्यों में पलायन शुरू कर दिया है। सूखे की आशंका के मद्देनजर मजदूर दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा समेत अन्य जगहों की ओर रोजगार की तलाश में निकल रहे हैं।

पटना जिले के कमोबेश सभी प्रखंडों में यही हाल है। बख्तियारपुर में सूखा देख मजदूर बाहर जा रहे हैं। मानसून में कम बारिश से दुल्हिन बाजार प्रखंड के किसान और मजदूर बुरी तरह से प्रभावित हैं। सरकार से राहत नहीं मिल रही है। ऐसे में मजदूर काम की तलाश में बाहर जाने को मजबूर हैं। मसौढ़ी में बारिश नहीं होने पर खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। इससे छोटे किसानों और मजदूरों की परेशान बढ़ गई है। मनरेगा से काम न के बराबर मिल रहा है। रोजगार की तलाश में खेतिहर मजदूर मकान निर्माण एवं अन्य दूसरी मजदूरी करने के अलावा प्रदेश से बाहर काम की तलाश में जाना फिलहाल विवशता बनकर रह गई है। कई गांवों से मजदूर दूसरे राज्यों में निकल गए हैं।

मनरेगा में भी काम नहीं मिल पा रहा है

बारिश नहीं होने से मनेर प्रखंड के दियारा की जमीन पर उपजने वाली खरीफ की फसल का हाल बेहाल है। खेतो में लगी रहर, मूंग और बाजरा, मकई के खेत में फसल से ऊंची घास हो गई है। प्रखंड में मनरेगा का काम नहीं हो रहा है। मजदूर दूसरे प्रदेशों में पलायन कर रहे हैं। दनियावां में सभी छह पंचायतों में खेती-किसानी का काम ठप है। पानी का स्तर नीचे चला गया है। कमाने के लिए मजदूर दिल्ली, हरियाणा के मनेशर और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में पलायन कर रहे हैं।

फतुहा प्रखंड में 30 फीसदी तक ही धान की रोपनी हो पाई है। ऐसे में छोटे किसान घर बैठे बारिश का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, काम नहीं मिलने से कई मजदूर दिल्ली, हरियाणा, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में पलायन कर रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि मनरेगा कार्ड बने होने के बावजूद काम न मिलने से वे लोग बाहर जाने को मजबूर हैं।

नहर में पानी आने पर बिक्रम के किसानों और मजदूरों को थोड़े दिनों के लिए काम मिला। अब रोपनी खत्म होने के बाद वे बेरोजगार हो गए हैं। खेतीहर मजदूर योगेंद्र, मनोज, मंटू, कमल, आदि ने बताया कि रोपनी खत्म होने के बाद से घर बैठे हैं। मनरेगा में काम मिल नहीं पा रहा है। इसलिए काम के सिलसिले में बाहर जाना मजबूरी है। यहां के मजदूर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, आदि शहरों में काम करने निकल गए हैं। कुछ जाने की तैयारी में हैं।

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