बिहार में शिक्षक के 32 हजार से अधिक पदों पर बहाली के लिए सरकार ने बढ़ाया बड़ा कदम

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बिहार सरकार ने छठे चरण के तहत 32,714 पदों के विरुद्ध माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों की नियोजन प्रक्रिया को पूरी करने के लिए अपने स्‍तर से कोशिशें तेज कर दी हैं। इसके लिए सरकार ने पटना उच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की है। शनिवार को शिक्षा एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि इस याचिका के माध्यम से माननीय उच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि अगले माह से नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई शुरू होगी। पंचायत स्तर पर जो नए माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थापित किए गए हैं, उनमें शिक्षकों की कमी है। इसलिए शिक्षकों की कमी दूर करने और बच्चों की पढ़ाई के हित में छठे चरण की शिक्षक नियोजन प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दी जाए।

एसटीईटी पास अभ्यर्थियों को मिलेगा मौका

विजय कुमार चौधरी ने बताया कि पटना उच्च न्यायालय से विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से यह अनुरोध किया गया है कि चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों की नियोजन प्रक्रिया पूरी करने के बाद 3 से 6 माह के अंदर सातवें चरण की माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक पदों के खाली पदों के विरुद्ध एसटीईटी पास अभ्यर्थियों की नियोजन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। यदि इस दौरान किसी अभ्यर्थी की नियोजन प्रक्रिया में उम्र-सीमा की समाप्ति बाधा बनती है तो सीमा में छूट का मौका दिया जाएगा। लेकिन, एसटीईटी पास किसी भी अभ्यर्थी को शिक्षक नियोजन प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। बता दें कि इस साल राज्य में माध्यमिक शिक्षकों के 40,665 एवं उच्च माध्यमिक के 47,896 पदों पर नियुक्ति होनी है।

न्यायालय से अनुमति नहीं मिलने पर छठे चरण की नियोजन प्रक्रिया करनी पड़ेगी रद

यदि उच्च न्यायालय ने सरकार को छठे चरण की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति नहीं दी तो एसटीईटी पास अभ्यर्थियों को इसी चरण में शामिल करने का आदेश दिया तो सरकार को विवश होकर छठे चरण की माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों की नियोजन प्रक्रिया को रद करनी पड़ेगी और फिर विज्ञापन निकाल कर सभी अभ्यर्थियों से नियोजन इकाईयों में आवेदन लेना पड़ेगा। इस प्रकार वर्तमान चयनित अभ्यर्थियों को प्रभावित होना पड़ेगा। यहां बता दें कि  चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों की अंतिम मेधा सूची तैयार है और पिछले माह 17-18 फरवरी को नियुक्ति पत्र दिया जाना था। तभी उच्च न्यायालय ने एक लोक हित याचिका के आधार पर नियोजन प्रक्रिया पूरी करने पर रोक लगा दी थी

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