बिहार में नीतीश कुमार का मॉडल बेस्ट, जनसंख्या नियंत्रण कानून पर जेडीयू का जवाब

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जनसंख्या नियंत्रण पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का मॉडल सर्वश्रेष्ठ है। यह बिहार में सफल रहा है। इस मॉडल की सभी ने सराहना की है। जदयू के प्रदेश प्रवक्ताओं ने संयुक्त रूप से यह बात मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में कही। प्रवक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के विकास और जनजागरण से ही जनसंख्या पर नियंत्रण किया जा सकता है। सिर्फ कानून बनाकर जनसंख्या पर काबू नहीं पाया जा सकता है। पार्टी कार्यालय में प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि हमारी पार्टी का साफ मानना है कि कानून बना देने अथवा सख्ती से जनसंख्या नियंत्रण को सफल नहीं किया जा सकता है। दुनिया के कई देशों के उदाहरण सामने हैं, जो साबित करते हैं कि लोगों को जागरूक कर ही इसमें सफलता मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने शिक्षा के विकास के साथ जनसंख्या नियंत्रण को भी जोड़ा। खासकर लड़कियों की उच्च शिक्षा ग्रहण कराने के लिए व्यापक स्तर पर कई योजनाएं चलाईं। इससे बिहार में जनसंख्या दर में काफी कमी आई है। राष्ट्रीय स्तर पर जारी नेशनल फेमली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2015-16 से वर्ष 2019-21 के बीच देश में प्रजनन दर में 0.20 की कमी आई, बल्कि बिहार में यह दर 0.43 रही। इस तरह देश से बेहतर स्थिति बिहार रहा है।

उन्होंने बिना किसी का नाम लिये यह भी कहा कि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कुछ लोगों द्वारा बिहार की नकारात्मक छवि देश के सामने पेश करने और समाज में विषाक्त वातावरण पैदा करने की कोशिश की जा रही है। कहा कि बंगला देश प्रजनन दर में लगातार कमी लाने में सफल रहा है, जहां पर व्यापक स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया गया। वहीं, चीन ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सख्त कानून बनाया पर, उसे अपने नियम में कई बार बदलाव करने पड़े। यह भी कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में जनसंख्या नियंत्रण के लिए अपनाई गई नसबंदी योजना असफल रही। इसके लिए पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा वर्ष 1976 में जनसंख्या नियंत्रण आयोग का गठन किया। दूसरी बार वर्ष 2000 में अटली जी की सरकार में जनसंख्या नियंत्रण आयोग बनाया गाय। इसमें यह तय किया गया था कि सरकारी सेवा में जिन्हें दो या दे से कम बच्चे हों, उन्हें सरकारी सेवा या सरकारी सुविधा में प्राथमिकता देनी चाहिए। परंतु अटल जी की सरकार द्वारा इसको अस्वीकृत करते हुए विस्तृत नीति बनाकर शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्या केंद्रित किया गया।

देश प्रवक्ता निखिल मंडल ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण को लेकर जदयू शुरू से सजग और चिंतित रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा के विकास के लिए किये गये कार्यों से बिहार में लगातार जनसंख्या नियंत्रण हो रहा है। मुख्यमंत्री ने भी कई बार इस संबंध में अपनी बात कही है। अगले कुछ सालों में बिहार की प्रजनन दर दो तक पहुंच जाएगी। इस मौके पर प्रदेश प्रवक्ता अरविंद निषाद भी मौजूद थे।

अधिक जनसंख्या घनत्व के बाद भी केरल विकसित राज्य

नीरज कुमार ने कहा कि कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि बिहार का जनसंख्या घनत्व प्रदेश के पिछड़ेपन का मुख्य कारण है। यहां का अधिक प्रजनन दर इसके लिए दोषी है। लेकिन, यह कुतर्क है, जिसे दुष्प्रचारित किया जा रहा है। देश में राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या घनत्व के मामले में बिहार और बंगाल के बाद केरल तीसरे स्थान पर है। सवाल यह उठता है कि जब जनसंख्या घनत्व पिछड़ापन का कारण है तो केरल जनसंख्या घनत्व में तीसरे स्थान पर होने के बावजूद हिन्दुस्तान का सर्वाधिक विकसित राज्य की श्रेणी में कैसे है।

 

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