बिहार में मौत को दावत! 1700 अस्पताल सड़क व रिहायशी इलाकों में मेडिकल कचरा फेंक रहे

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बिहार की राजधानी पटना में 1700 अस्पताल सड़क और रिहायशी इलाकों में मेडिकल कचरा फेंक रहे हैं। यह कचरा लोगों के जीवन में जहर घोल रहा है। सड़क पर फेंके जाने से अस्पतालों से निकला करीब डेढ़ टन मेडिकल कचरे का निष्पादन बैरिया स्थित मेडिकल कचरा प्लांट में नहीं हो पा रहा है। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ की पड़ताल में अस्पतालों की यह लापरवाही सामने आई है।

आईजीआईएमएस है मॉनिटरिंग इकाई मेडिकल कचरा निस्तारण के लिए पटना और आसपास के 3541 अस्पताल व लैब आईजीआईएमएस से संबद्ध हैं। सरकार ने आईजीआईएमएस को कचरा निस्तारण के लिए मॉनिटरिंग इकाई बनाया है। एजेंसी संगम बायोटेक द्वारा अस्पतालों से निकले मेडिकल कचरे को नष्ट किया जाना है। एजेंसी के बिहार प्रभारी पवन कुमार ने बताया कि मात्र 1800 अस्पतालों से ही निकला कचरा निस्तारण के लिए उन्हें मिलता है। शेष 1741 अस्पताल कचरा निस्तारण कैसे करते हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं है।

बीमारी फैलने खतरा

पटना सिटी, कंकड़बाग, राजेंद्रनगर से लेकर दानापुर तक के रिहायशी इलाके और बाइपास के आसपास चल रहे सैकड़ों छोटे-बड़े अस्पतालों में से कुछ अस्पताल ही मेडिकल कचरा उन्हें देते हैं। इसकी जानकारी प्रदूषण नियंत्रण विभाग व आईजीआईएमएस को दी गई है। कार्रवाई की जिम्मेवारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की है। ऐसे अस्पतालों पर एक लाख से पांच लाख तक का जुर्माना और जेल तक का प्रावधान है। वहीं बैरिया के जिस हिस्स्से में कचरा प्लांट है, वहां बड़ी आबादी बस गई है। इसके पूर्व में इलाहीबाग, पश्चिम में मनोहरपुर कछुआरा, उत्तर में जकारियापुर और दक्षिण में निगम का कचरा प्वांइट है। जकारियापुर के विनोद पाठक, अमृता कुमारी ने बताया कि कचरे जमा होने से बीमारी फैलने खतरा बना रहता है। बाहर खुले में एजेंसी के कचरा वाहन अस्पतालों की गंदगी बिखेर देते हैं।

मेडिकल कचरे में होते हैं ये घातक पदार्थ

● सड़े-गले मानव अंग

● हानिकारक सीरिंज

● खून लगी संक्रमित रूई

● बैंडेज, स्लाइन की बोतल

● सूई की खाली शीशी

● मास्क/ग्लब्स

हो सकती हैं ये बीमारियां

हेपेटाइटिस-जोंडिस, टाइफाइड, एड्स, पेट में संक्रमण, डायरिया, टेटनेस व अन्य संक्रामक बीमारियां

रामाचक बैरिया में है कचरा प्लांट, पीछे कूड़े का ढेर

रामाचक बैरिया में रोज करीब 15 टन निस्तारण क्षमता वाला मेडिकल कचरा प्लांट लगा है। यह छह वर्षों से कार्य कर रहा है। एजेंसी का दावा है कि 27 वाहनों से रोज 2800 किलो कचरा आता है। रविवार को प्लांट के पास भारी मात्रा में कचरा पड़ा दिखा। पूछे जाने पर एजेंसी संगम बायोटेक के संयोजक पवन कुमार ने बताया कि अस्पतालों को अलग-अलग बॉक्स में कचरा देना होता है पर ऐसा नहीं करते। इन्सुलेटर में नष्ट करने से पहले कचरे को अलग किया जाता है। इससे एक से दो दिन कचरा पड़ा रहता है।

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