बिहार में केवल नीतीश स्‍टाइल, कैसे माहौल से बेअसर रहे सीएम, इन उदाहरणों से समझिए

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माहौल से बेअसर नीतीश स्टाइल (Nitish Style) की इन दिनों राजनीतिक गलियारे में खूब है चर्चा। हालिया उदाहरणों के साथ लोग बगैर गुना-भाग के संपूर्ण गणित को लोग काफी सहजता से समझा रहे हैं। जिस वक्त जाति आधारित गणना (Caste Based Survey) पर केंद्र ने असमर्थता व्यक्त की उस समय राजनीतिक गलियारे में यह फैल गया कि एनडीए में अब सब कुछ ठीक नहीं। पर यहां नीतीश स्टाइल अपने हिसाब से ही था। जाति आधारित गणना पर भाजपा के लोग यहां तक कि एक-दो मंत्री भी अपने रौ में बोले जा रहे थे।

नीतीश कुमार ने किसी तरह की टिप्पणी नहीं की और सार्वजनिक रूप से सिर्फ यह बोलते रहे कि क्यों जरूरी है जाति आधारित गणना। सर्वदलीय बैठक का ऐलान हुआ तो भाजपा के सुर बदले और उनकी ओर से भी सर्वदलीय बैठक में सहभागिता रही। भाजपा ने खुल कर जाति आधारित गणना के नीतीश स्टैैंड का समर्थन किया। यह आसान नहीं था। इसके पूर्व जाति आधारित गणना को संपूर्ण विपक्ष का भी समर्थन था।

जाति आधारित गणना का फैसला और महाराणा प्रताप पर भी निर्णय

नीतीश स्टाइल पर चर्चा के क्रम में यह बात भी हो रही कि राज्य कैबिनेट ने जिस दिन जाति आधारित गणना को ले निर्णय लेकर 500 करोड़ रुपए की मंजूरी दी उसी दिन कैबिनेट ने यह भी फैसला लिया कि महाराणा प्रताप की जयंती (Maharana Pratap Birth Anniversary) पर पटना में राजकीय समारोह का आयोजन होगा और फ्रेजर रोड में उनकी प्रतिमा लगेगी। नीतीश कुमार कहते रहे हैं कि वह यूनिवर्सल स्कीम पर काम करते हैं। तुरंत महाराणा प्रताप को ले अपने पुराने वादे को पूरा किए जाने को ले कैबिनेट की मुहर लगा दी

राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर हुए फैसले पर भी कोई सवाल नहीं

आरंभ से यह चर्चा थी कि जदयू इस बार केंद्रीय मंत्री आरसीपी (Union Minister RCP Singh) को राज्यसभा नहीं भेजेगा। राजनीतिक गलियारे में किस्म-किस्म के नाम आए। ज्यादातर नाम नालंदा से ही चर्चा में थे। यह भी कहा गया कि नीतीश कुमार आखिरकार आरसीपी को भेज देंगे। पर यहां भी नीतीश स्टाइल अपने तरह से दिखा। बिहार से कोई नाम नहीं आया बल्कि झारखंड के खीरू महतो (Khiru Mahto) को उन्होंने राज्यसभा के लिए तय कर दिया। यह कहा कि पुराने कार्यकर्ता हैं और बिहार के बाहर के लोगों को भी पार्टी से उम्मीद है। किसी तरह का उबाल ही नहीं दिखा। इसी तरह महेंद्र प्रसाद की मृत्यु के बाद खाली हुई सीट पर अनिल हेगड़े को भेजने का फैसला भी चौैंकाने वाला था। यह बात स्थापित की जा रही कि जदयू कार्यकर्ता सेंट्रिक दल है।

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