बिहार में एग्जाम देने आए स्टूडेंट्स पेपर देख चौंके, प्रश्न पत्र मिलते ही सबके मन में आया एक सवाल

जानकारी

जिले के सभी 900 प्राथमिक तथा मध्य विद्यालयों में पांचवीं तथा आठवीं कक्षा की परीक्षा संपन्न हो गई। परीक्षा के आयोजन के लिए तैयारी नए सत्र की थी, लेकिन प्रश्न पत्र 2020 का मिला था। दरअसल, 2020 में कोरोना संक्रमण के कारण बच्चों की परीक्षा आयोजित नहीं की गई थी लेकिन प्रश्न पत्र का प्रकाशन हो गया था। ऐसे में इस प्रश्न पत्र का उपयोग 2022 की परीक्षा के लिए किया गया। विभागीय आदेश पर ही 2020 के प्रश्न पत्रों का उपयोग किया गया। शिक्षकों को तो विभाग के निर्देश की जानकारी थी,

इस कारण पुराने प्रश्न पत्र से वे अचंभित नहीं हुए लेकिन बच्चे इसे देखकर कुछ देर तक सोचने को मजबूर रहे। बाद में शिक्षकों ने बच्चों को पूरी बात बताई। हालांकि प्रश्न पत्रों को उत्तर देने में कोई ज्यादा समस्या नहीं हुई। सिलेबस भी पहले की ही तरह है। इस कारण बच्चे पुराने प्रश्न पत्रों को आसानी से हल करते रहे। वैसे, प्रश्न पत्रों पर 2020 की जगह 22 करना कोई ज्यादा कठिन कार्य नहीं था, लेकिन अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों द्वारा इस कार्य को नहीं किया गया।

  • – वर्ष 2020 के प्रश्न पत्र पर ही आयोजित हुई 2022 की परीक्षा, बच्चे अचंभित
  • – कोरोना काल में विद्यालय बंद होने से दो साल तक बाधित थीं परीक्षाएं

नए प्रश्न पत्र के प्रकाशन में होता खर्च उसकी हुई बचत

आम तौर पर सरकारी विभाग पर फिजूलखर्ची का आरोप लगाया जाता है, लेकिन शिक्षा विभाग ने बच्चों की परीक्षा मामले में खर्च कम करने की पहल की। यदि विभाग चाहता तो पुराने प्रश्न पत्र की जगह नए प्रश्न पत्रों का प्रकाशन करा सकता था, लेकिन पहले से प्रकाशित प्रश्न पत्रों का ही उपयोग करना मुनासिब समझा गया। परीक्षा के आयोजन में व्यवहारिक रूप से कोई परेशानी तो नहीं, बस बच्चे पुराने प्रश्न पत्र को देखकर कुछ देर तक असमंजस में रहे।

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