बिहार में एक ऐसा विश्वविद्यालय जहां पढ़ाई को छोड़ होतीं सभी गतिविधियां

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कहने को प्रदेश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय, लेकिन व्यवस्था ऐसी कि प्रवेश परीक्षा या परिणाम हो, कोई भी समय से जारी नहीं होता। तीन साल का स्नातक पांच साल और दो वर्ष का स्नातकोत्तर कोर्स चार वर्ष में पूरा होता है। अचरज की बात तो यह कि साल भर में नामांकन लेकर सिलेबस पूरा कराते हुए परीक्षा के बाद परिणाम भी देना है, लेकिन सात महीने से नामांकन ही चल रहा है। यह स्थिति है जिला मुख्यालय स्थित बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की। एक हजार करोड़ से अधिक बजट वाले विश्वविद्यालय परिसर में चारों ओर जंगली पौधे ऐसे उगे हैं, जैसे कोई वनीय क्षेत्र हो। भीतर प्रवेश करते ही चारों ओर गंदगी का अंबार और कुव्यवस्था। न अधिकारी समय से आते हैं और न कर्मचारी।

ऐसा हो भी क्यों न, यहां तो कुलपति ही योगदान के बाद से कभी कार्यालय में नहीं बैठे। यहां पढ़ाई से इतर सभी कार्य दनादन हो रहे, लेकिन शैक्षणिक माहौल बनाने की ओर किसी का भी ध्यान नहीं। रही सही कसर शिक्षक, कर्मचारी और छात्र संगठन पूरा कर दे रहे हैं। अधिकारी किसी की सुन नहीं रहे हैं और संगठनों की ओर से मांगों को मनवाने के लिए लगातार हंगामा और प्रदर्शन के कारण वर्किंग डे में विश्वविद्यालय बंद हो जा रहा है। इसके बाद जब माहौल बनने लगता है तो वित्तीय अनियमितता, घोटाला और पेंडिंग परिणाम के कारण विश्वविद्यालय की किरकिरी होती है।

यह है सत्र का हाल

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के विलंब सत्र का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस पीजी के सत्र 2021-23 का अगले वर्ष चौथे सेमेस्टर की परीक्षा हो जानी चाहिए थी। उसमें इस वर्ष नामांकन ही लिया जा रहा है। स्नातक में सत्र 2019-22, 2020-23 और 2021-24 की परीक्षाएं भी विलंब से हो रही हैं। राजभवन की ओर से लगातार दबाव बनाए जाने के बाद भी कोई असर नहीं हो रहा है।

शिक्षक व कर्मचारी की कमी पर सुरक्षा व्यवस्था सजग

विश्वविद्यालय में शिक्षक और कर्मचारी की नियुक्ति के लिए बजट का टोटा बताया जा रहा है, लेकिन सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति सभी पीजी विभागों में की गई है। पीजी विभागाध्यक्षों का भी कहना है कि उन्हें साफ-सफाई स्वयं भी करनी होती है। ऐसे में चतुर्थवर्गीय कर्मियों की नियुक्ति करनी चाहिए थी। विभागों को कंटीजेंसी की राशि नहीं मिल रही है, लेकिन सुरक्षाकर्मियों के नाम पर प्रत्येक महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं

 विश्वविद्यालय के पीजी विभागों में शिक्षक और कर्मियों की नियुक्ति शीघ्र की जाएगी। अन्य संस्थान से शिक्षकों का तबादला पीजी विभागों में किया जाएगा। परिसर में फैली गंदगी और जंगली पौधों की सफाई कराई जाएगी। इसके लिए संबंधित विभाग को निर्देश दिया गया है। विश्वविद्यालय में बेहतर माहौल बने, इसके लिए प्रयास हो रहा है।— डा.आरके ठाकुर, कुलसचिव, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय

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