बिहार में दिखी दुर्लभ प्रजाति की एटलस मॉथ तितली, पंख पर सांप जैसी आकृति; देवी मान पूजा करने लगे लोग

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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से सटे हरनाटाड़ वनक्षेत्र के बैरिया काला गांव में रविवार की दोपहर बाद दुर्लभ प्रजाति की एटलस मॉथ तितली मिली है। उसके दोनों पंखों पर सांप की आकृति बनी है। तितली गांव में एक घर के पास जल रहे बल्ब पर बैठी हुई थी। गांव में जानकारी फैली तो लोग वन देवी मानकर उसकी पूजा करने लगे। उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना पर सोमवार को वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। तितली को रेस्क्यू कर जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया। इसकी पुष्टि बगहा वनक्षेत्र अधिकारी सुनील कुमार ने की है।

उन्होंने बताया कि एटलस मॉथ दुर्लभ प्रजाति की तितली है। यह अमेरिका, मलेशिया, चीन, स्पेशन, अफ्रीका आदि देशों में पाया जाता है। सभी देशों में इसे अलग-अलग नाम से जाना जाता है। उसके पंख 24 सेंटीमीटर तक के होते हैं। उसके पंख का फैलाव 15 से 17 सेंटीमीटर तक होता है।

एटलथ मॉथ तितली का 10 दिनों का होता है जीवन चक्र

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी कमलेश मौर्या ने बताया कि एटलथ मॉथ जून से अगस्त के अंत तक दिखाई देते हैं। इसके अंडे से बच्चे दो सप्ताह में निकलते हैं। प्यूपा से बड़ी तितली बनने में 21 दिनों तक का समय लग जाता है। पूरा आकार लेने के बाद इसका जीवन चक्र 10 दिनों का होता है।

दुर्लभ प्रजातियों के कीटों में से एक एटलस मॉथ

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी कमलेश मौर्या ने बताया कि आम लोगों को इस तितली के बारे में जानकारी नहीं है। यह दुर्लभ प्रजाति की तितली है। यह खुशनसीब लोगों को ही दिखाई देती है।

उनके दोनों पंखों पर है सांप की आकृति

एटलस मॉथ सबसे बड़े कीटों में से एक है। इसको खतरा महसूस होने पर सांप की तरह दिखने वाले पंख को फड़फड़ाती है। इससे शिकार करने वाले जीव डर जाते हैं। इससे उसकी सुरक्षा होती है।

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