बिहार में चुपके से पंख फैला रहा डेंगू, पटना और नालंदा बने हॉटस्पॉट

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बिहार में डेंगू चुपके से पंख फैला रहा है और पटना इसका हॉट स्पॉट बन चुका है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में अबतक 2363 डेंगू मरीजों की पहचान हुई है। इनमें सर्वाधिक 1806 पटना के हैं। दूसरे राज्यों से बिहार आए 14 लोगों भी डेंगू से पीड़ित पाए गए हैं। राज्य में दूसरा सबसे बड़ा हॉटस्पॉट नालंदा बना हुआ है। यहां अब तक 202 डेंगू मरीजों मिले हैं। पटना में 1 और नालंदा में 2 डेंगू पीड़ित की इलाज के दौरान अबतक मौत हुई है। हालांकि पारिजन एवं अन्य सूत्रों के अनुसार नालंदा में अब तक 436 डेंगू मरीज मिले हैं। 13 की मौत हो चुकी है, जबकि गोपालगंज में 67 पीड़ित चिन्हित किए गए हैं और यहां 5 की मौत हुई है।

बिहार के 9 सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में डेंगू जांच की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है। इनके अतिरिक्त आईजीआईएमएस, एम्स पटना, राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में भी डेंगू की जांच की जा रही है। इन स्वास्थ्य संस्थानों में डेंगू की जांच भारत सरकार द्वारा अधिकृत एनएस-1 एलाइजा और आइजीएम एलाइजा किटों के माध्यम से की जाती है। राज्य सरकार इन्हीं जांच के आधार पर डेंगू पीड़ित की पुष्टि करती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिलास्तर पर डेंगू की जांच रैपिड किट से होती है। रैपिड जांच में पॉजिटिव पाए जाने पर मरीज का ब्लड सैंपल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एनएस-1 एलाइजा जांच के लिए भेजा जाता है, तभी डेंगू की पुष्टि की जाती है।

जिला अस्पतालों में डेंगू मरीजों के लिए बेड रिजर्व

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों में 5-5 बेड डेंगू मरीजों के इलाज के लिए आरक्षित करने का निर्देश दिया है। निर्देश के आधार पर जिला अस्पतालों में डेंगू मरीजों के लिए बेड चिह्नित कर लिए गए हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में भी डेंगू वार्ड बनाए गए हैं। निजी अस्पतालों द्वारा सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल और विभाग को डेंगू के मामलों की जानकारी नहीं दी जा रही है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि पटना के कुछ अस्पतालों ने सूचना देनी शुरू कर दी है। वहीं, पारस अस्पताल सीधे पीएमसीएच को मामलों की जानकारी देता है।

पिछले दो सालों के कोरोना काल के दौरान डेंगू के मामले अपेक्षाकृत कम आए थे। लॉकडाउन और आमलोगों की गतिविधियों पर नियंत्रण का असर डेंगू पर दिखा था। 2020 में राज्य में कुल 493 तो 2021 में 633 डेंगू के मामले सामने आए थे। इसके पूर्व 2019 में राज्य में 6667 डेंगू के मामले सामने आए थे। पटना में सोमवार को 163 नए डेंगू पीड़ित मिले। इनमें से 64 पीएमसीएच और 39 आईजीआइएमएस में हुई जांच में संक्रमित पाए गए। वहीं जिला संक्रामक रोग नियंत्रण पदाधिकारी के कार्यालय से 60 पीड़ितों की जानकारी मिली है। वहीं एनएमसीएच के माइरोबायोलॉजी विभाग में सोमवार को 88 सैंपल की जांच की गयी। इनमें 43 की रिपोर्ट पॉजीटिव आई।

गया में खून से प्लेटलेट्स अलग करने की सुविधा नहीं

गया जिले में इन दिनों डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन यहां खून से प्लेटलेट्स अलग करने की सुविधा नहीं है। मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 11 दिनों में डेंगू के 20 मरीज सामने आए हैं। इनमें तीन अस्पताल में भर्ती हैं। मगध मेडिकल में ब्लड सेपरेशन यूनिट बनकर तैयार है। मई में केंद्रीय टीम ने इसकी जांच भी की थी। उन्होंने कुछ कमियों को दूर करने का निर्देश दिया था। कमियों को दूर कर सूचना दी गई है, लेकिन अभी सेपरेशन का लाइसेंस नहीं मिला है। यदि किसी मरीज को प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ी तो रेफर करने के अलावा कोई उपाय नहीं है। मगध मेडिकल के अधीक्षक डॉ. गोपाल कृष्ण ने बताया कि यहां जो भी कमियां थीं उन्हें किया जा चुका है।

मुजफ्फरपुर में इस बार शहर से अधिक गांवों में प्रकोप

मुजफ्फरपुर के गांवों में भी डेंगू का डंक फैला है और सरकारी अस्पतालों में जांच किट ही नहीं पहुंच रहे हैं। मरीज निजी पैथोलॉजी लैब में एक हजार रुपये देकर जांच कराने को मजबूर हैं। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि डेंगू की जांच किट की अब खरीद की जाएगी। मुजफ्फरपुर जिले में अब तक डेंगू के 13 मरीज मिले हैं जिसमें 11 ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। इस वर्ष शहरी क्षेत्र में कम, गांव में ज्यादा मामले मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का भी कहना है कि यह पहली बार है कि डेंगू ने गांवों में पैर पसारे हैं। पिछले 28 दिन में उत्तर बिहार में डेंगू के 74 मामले सामने आये हैं। दो सितंबर को उत्तर बिहार के पूर्वी व पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर और मुजफ्फरपुर जिलों को मिलाकर 66 डेंगू के लक्षण वाले केस थे जो 29 सितंबर को 140 हो गये।

पूर्वी बिहार में डेंगू की जांच के लिए किट नहीं

कोसी, सीमाचंल और पूर्वी बिहार में सिर्फ पूर्णिया, कटिहार और बांका में डेंगू के मामले सामने आए हैं। इन जिलों में जांच की सुविधा पर्याप्त नहीं है। सैंपल को पास के मेडिकल कॉलेज या पटना भेजा जाता है। अधिकतर सरकारी अस्पतालों में जांच किट भी उपलब्ध नहीं है। पूर्णिया में एक संदिग्ध रोगी का सैंपल शनिवार को जांच के लिए पटना भेजा गया। जिला रोग नियंत्रण पदाधिकारी रविनंदन ने बताया कि यहां एनएस1 की जांच होती है। सैंपल एलिजा कन्फर्म के लिए पूर्णिया से बाहर मेडिकल कॉलेज या फिर पटना भेजा जाता है। सुपौल में सिर्फ सदर अस्पताल में जांच की सुविधा है। मधेपुरा जिले में डेंगू की जांच करने वाली किट खत्म हो गयी है। केवल सहरसा में सदर समेत पीएचसी स्तर पर पांच से सात जांच किट उपलब्ध है। पूर्वी बिहार के मुंगेर, खगड़िया, जमुई, लखीसराय के अस्पतालों में जांच किट तक उपलब्ध नहीं है।

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