बिहार को मिला बड़ा तोहफा: अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से जुड़ा राज्य, 30 दिनों में तय होगी 2350 किलोमीटर की दूरी, जानें क्या होगा खास

प्रेरणादायक

केंद्र सरकार की गति शक्ति योजना के तहत शनिवार को पटना के गायघाट बंदरगाह से एफसीआई का दो सौ टन चावल लेकर कार्गो शिप रवाना हुआ। यह गंगा के रास्ते कोलकाता के हल्दिया बंदरगाह और वहां से बांग्लादेश होते हुए गुवाहाटी के पांडू बंदरगाह तक पहुंचेगा। यह पहली बार है जब पटना से हल्दिया, बांग्लादेश होते हुए गुवाहाटी तक कार्गो जाएगा। यानी बिहार अब अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से भी जुड़ गया। पहले पटना से कोई भी कार्गो हल्दिया तक ही जाता था।

इससे पहले भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के गायघाट टर्मिनल पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल, राज्यमंत्री शांतनु ठाकुर, केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे, बिहार के उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद व रेणु देवी, सांसद राजीव प्रताप रूडी, पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, सूबे के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, मेयर सीता साहू, स्थानीय विधायक नन्दकिशोर यादव ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर कार्गो को रवाना किया।

 

वहीं, वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और बांग्लादेश के जहाजरानी मंत्री खालिद महमूद चौधरी भी कार्यक्रम से जुड़े। मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि आज का दिन बिहार के लिए महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने गति-शक्ति योजना के तहत बिहार को बड़ा तोहफा दिया है। जलमार्ग से व्यापार शुरू होने से व्यवसाय के लिए एक नया द्वार खुल गया है। भारत में 123 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं। इनमें 23 को विकसित करने का काम जारी है। 

 

इससे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल का उत्पादन बांग्लादेश, नेपाल से लेकर भूटान तक पहुंचेगा। उन्होंने बिहार के सारण जिला में कालू घाट बंदरगाह का शिलान्यास किए जाने में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी धन्यवाद दिया। आईडब्लूएआई के अध्यक्ष संजय बंदोपाध्याय ने बताया कि गायघाट बंदरगाह से एमवी लाल बहादुर शास्त्री जहाज भागलपुर, साहेबगंज, फरक्का, कोलकाता, बांग्लादेश जलमार्ग से होते हुए 2350 किलोमीटर की दूरी 30 दिनों में तय कर गुवाहाटी पहुंचेगा। फिर यही जहाज असम से कार्गो लेकर हल्दिया लौटेगा। 

उन्होंने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर पहली बार हो रहे ट्रायल के दौरान जहाज पर सवार विशेषज्ञ रास्ते में डेटा कलेक्शन भी करेंगे, ताकि जलमार्ग को और सुगम बनाया जा सके। सांसद राजीव प्रसाद रूडी ने मंत्री से जर्मनी की तर्ज़ पर बाढ़ नियंत्रण उपायों व ग्रीन बेल्ट बनाने की बात रखी। उल्लेखनीय है कि पटना से कोलकाता के हल्दिया बंदरगाह तक पहले से कार्गो की आवाजाही हो रही है। यह पहली बार है जब पटना से हल्दिया, बांग्लादेश होते हुए गुवाहाटी तक कार्गो जाएगा।

 

4600 करोड़ से होगा जलमार्ग का विकास

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि गायघाट टर्मिनल से पांडू (गुवाहाटी) तक अनाज की आवाजाही ह्यगेटवे ऑफ नॉर्थ ईस्टह्ण के लिए एक नया द्वार खोलेगी। कहा कि 4600 करोड़ से इस जलमार्ग का विकास होगा। कालूघाट में 78 करोड़ से इंटरमॉडल टर्मिनल क्षेत्र के निर्माण से सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे उत्तर बिहार की सड़कों पर भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी और इस क्षेत्र में कार्गो के परिवहन के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा। कहा कि पटना से यह मार्ग पूर्वोत्तर के लिए खाद्यान्न और माल की आवाजाही के पारंपरिक तरीके के लिए एक व्यवहारिक विकल्प साबित हो सकता है।

 

श्री गोयल ने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में निर्बाध नेविगेशन के लिए भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल (आईबीपी) मार्ग के 2 हिस्सों का विकास किया जा रहा है। पूर्वोत्तर के लिए 1,500 करोड़ पीएम-डिवाइन बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास परियोजनाओं को आवंटित किया गया है। पीएम गतिशक्ति के तहत यह जलमार्ग उन 7 इंजनों में से एक है जो आर्थिक विकास में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा। बताया कि केंद्र सरकार जल मार्ग विकास परियोजना शुरू की है। 2,000 टन तक के जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए रूट-1 (गंगा) की क्षमता वृद्धि के लिए 4,600 करोड़ खर्च किए जाएंगे। राशि वाराणसी, साहिबगंज और हल्दिया में मल्टी-मॉडल टर्मिनल का निर्माण व स्थापना, रो-रो टर्मिनल, जेटी, पोत मरम्मत और रखरखाव सुविधाओं पर खर्च होगी। कहा कि 24 राज्यों में 106 नए जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया है। 

 

दोनों देशों के रिश्ते होंगे और मजबूत: खालिद महमूद 

बांग्लादेश के मंत्री खालिद महमूद ने भी वर्चुअल तरीके से विचार रखे। कहा, पटना से हल्दिया होते हुए बांग्लादेश के रास्ते गुवाहाटी तक जहाज का परिचालन शुरू होने से दोनों देशों का विकास होगा। प्रधानमंत्री शेख हसीना और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से यह संभव हो सका है। इससे भारत और बांग्लादेश के रिश्ते और मजबूत होंगे। इस मार्ग से बांग्लादेश का सामान भी भूटान, नेपाल, भारत के विभिन्न राज्यों एवं बिहार तक भेजना तथा वहां से मंगवाना आसान होगा।

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