बिहार के लिए अर्थपूर्ण होंगे यूपी समेत पांच राज्यों के चुनाव नतीजे, तय होगी देश की राजनीतिक तस्‍वीर

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महज कुछ घंटे का इंतजार है। यूपी समेत पांच राज्यों के चुनाव परिणाम से देश की राजनीति की दशा-दिशा तय होने वाली है। बिहार भी अछूता नहीं रह सकता है। पड़ोसी राज्य एवं सामाजिक-राजनीतिक वातावरण एक जैसा होने के चलते बिहार की राजनीति यूपी से सबसे ज्यादा प्रभावित होती रही है। इस बार भी तय है। खासकर यूपी का नतीजा तय करेगा कि भाजपा के सामने आगे की किसकी तैयारी कैसी होगी।

बिहार में संयुक्त रूप से सरकार चलाने वाले सत्तारूढ़ दल भाजपा, जदयू और वीआइपी के साथ-साथ विपक्ष की राजनीति करने वाले राजद, कांग्रेस और वामदलों की रणनीति के लिए भी पांच राज्यों के नतीजे अर्थपूर्ण होंगे। सभी राजनीतिक दलों में आंतरिक और बाह्य दोनों तरह की हलचल होगी। इससे वर्तमान की राजनीति में दलों की भूमिका और आगे की रणनीति तय करने में मदद मिलेगी।

बिहार में भाजपा के सहयोग से सरकार बनाने और चलाने वाले नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने यूपी में अलग होकर चुनाव लड़ा है। नीतीश कुमार तो प्रचार के लिए नहीं गए थे, लेकिन जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह समेत अन्य कई बड़े नेताओं ने कमान संभाली थी। जदयू ने 26 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। परिणाम पर भाजपा समेत सभी दूसरे दलों की नजर तो है ही, जदयू के कुछ नेताओं का प्रदर्शन भी परस्पर तराजू पर होगा। कामयाबी और नाकामयाबी का विश्लेषण होगा। इसी तरह 55 सीटों पर लड़ रहे विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) के प्रदर्शन की तुलना भी जदयू से की जाएगी। वीआइपी भी जदयू की तरह ही यूपी में भाजपा से अलग होकर मैदान में है।

बड़ा फर्क विपक्ष पर पड़ने वाला है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने मुलायम सिंह से रिश्तेदारी निभाते हुए समाजवादी पार्टी को बिना शर्त समर्थन दिया है। इसलिए तेजस्वी यादव के भविष्य की रणनीति भी अखिलेश यादव की हार-जीत के अनुसार तय होगी। भाजपा को पराजित करने के सपने देखने वालों में ममता बनर्जी, के स्टालिन, के चंद्रशेखर राव, अरविंद केजरीवाल और शरद पवार के साथ तेजस्वी भी शामिल हैं। अखिलेश की हार उनके उत्साह पर पानी फेर सकता है। विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस को साइड करके वामदलों के साथ आगे बढ़ रहे राजद को राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा की याद फिर से आ सकती है।

भाजपा की हार पर बिहार में कांग्रेस को राजद की ओर से धक्का लगना तय माना जा रहा है। ऐसे में अखिलेश की तरह तेजस्वी भी बिहार में अपने दम पर आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे। वैसे इतना तो तय है कि यूपी में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं होने जा रहा है। पंजाब, गोवा एवं उत्तराखंड में अगर कांग्रेस बेहतर कर पाती है तो कुछ हद तक बिहार में भी गठबंधन के लिए वह तेजस्वी के सामने तनकर खड़ी हो सकती है। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के साथ राजद के गठबंधन की बात लालू प्रसाद भी पहले से कहते रहे हैैं।

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