बिहार के जर्दालु आम और शाही लीची का लुत्फ उठाएंगे विदेश के लोग, पैकेजिंग पर होगा विशेष ध्यान

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बिहार के कृषि उत्पादों की ताजगी के साथ सुरक्षित निर्यात के लिए कृषि विभाग के बिहार कृषि मूल्य संवद्र्धन प्रणाली (बावास) डिवीजन ने शुक्रवार को इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पैकेजिंग, मुंबई के साथ समझौता किया है। इस पहल के बाद अब बिहार से शाही लीची, जर्दालु आम, कतरनी चावल, मगही पान, मिथिला मखाना आदि विशिष्ट कृषि और बागवानी उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग के साथ निर्यात करने की तैयारी है। इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पैकेजिंग इसके लिए प्रशिक्षण देगा।

दरअसल, सरकार उत्पादक और कारोबारियों के बीच यह संदेश देना चाहती है कि मनमोहक पैकेज ग्राहकों को उत्पाद खरीदने के लिए लुभाते तो हैं ही, इसके साथ ही पैकेजिंग उत्पाद, सुरक्षा, हैंडलिंग, भंडारण, उपयोग में सुविधाजनक भी होते हैं। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का भी आयोजन किया गया।

कृषि सचिव एन सरवण कुमार ने बामेती, पटना के सभागार में निर्यात के लिए बिहार के चिह्नित उत्पादों की पैकेजिंग का महत्व विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन भी किया। सचिव ने बताया कि बिहार में कृषि उत्पाद के उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि हुई है। राज्य में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़कर 180 लाख टन, सब्जियों का उत्पादन 179 लाख टन और फलों का उत्पादन 50 लाख टन हो गया है। कृषि उत्पादों में विविधता लाने के मामले में भी प्रगति हुई है, जिसके कारण आज बिहार सब्जी उत्पादन में चौथे और फल उत्पादन में आठवें स्थान पर है।

न से तीन हजार करोड़ हुआ निर्यात

 

बिहार में वर्ष 2005-06 में कृषि-निर्यात तीन करोड़ रुपये का था। यह वर्ष 2020-21 में बढ़कर करीब तीन हजार करोड़ रुपये हो गया है। कृषि जिंसों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात में तेजी लाने के लिए बिहार कृषि निर्यात नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है।

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