बिहार और झारखंड में हवा के खराब हाल से बढ़ रहे सांस के मरीज, डाक्‍टरों ने बताया बचाव का तरीका

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ठंड के साथ बिहार में बढ़े प्रदूषण के कारण सांस के रोगियों की संख्या बढ़ी है। इसके साथ ही हृदय, ब्रेन स्ट्रोक, फेफड़े के कैंसर से लेकर टीबी रोगियों की संख्या बढ़ रही है। सिर्फ पीएमसीएच के टीबी व चेस्ट विभाग में हर दिन औसतन 60 से 70 मरीज पहुंच रहे हैं। दो वर्ष कोरोना महामारी के बाद तीसरे वर्ष ऐसा हो रहा है।

प्रदूषण से बचने को मास्‍क पहनकर बाहर निकलें

ऐसे में प्रदूषण के गंभीर परिणामों से बचने के लिए जरूरी है कि मास्क पहन कर ही लोग घरों से निकलें, खासकर बाइक सवार लोग। क्योंकि, 2.5 माइक्रोन से कम आकार के धूल-धुएं के कण फेफड़े के साथ खून तक में मिल जाते हैं और कार्डियोवैस्कुलर, हार्ट अटैक और फेफड़े के कैंसर तक का कारण बनते हैं। पीएमसीएच के विभागाध्यक्ष डा. पीके अग्रवाल, श्वसन रोग विशेषज्ञ डा. बीके चौधरी और चेस्ट फिजीशियन सह ब्रांकोस्कोपिस्ट डा. विनय कृष्णा ने ये बातें कही हैं।

मास्‍क पहनने से कई तरह के फायदे

 

 

डा. पीके अग्रवाल ने कहा कि 5 से 10 माइक्रोन आकार के कण जैसे ट्रैक्टरों से गिरते बालू, ट्रक व बड़े वाहनों से उड़ती धूल श्वांस नली में जाकर श्वसन प्रक्रिया में बाधक बनती हैं। वहीं डा. बीके चौधरी ने कहा कि मास्क केवल धूल-धुएं के कणों को रोक कर सांस की समस्या से ही नहीं बचाता बल्कि यह खतरनाक मल्टी ड्रग रजिस्टेंस के खतरे को भी काफी हद तक कम कर देता है।

मेटाबॉलिक सिंड्रोम

मेटाबॉलिक सिंड्रोम में एक साथ कई समस्याएं होती है, इसमें ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, फैट आदि की समस्याएं बढ़ जाती है। अगर आप इन बीमारियों के शिकार हैं, तो ज्यादा मात्रा में चावल खाने से परहेज करें।

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