बिहार मेरे लिए मंदिर के समान है और छठ मईया ने मुझे इस धरती से चुना है- कल्पना

राजनीति

पटना: फेमस भोजपुरी सिंगर कल्पना पटवारी आज बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंची जहां उन्हें बिहार बीजेपी की ओर से सम्मानित किया गया। इस मौके पर कल्पना ने कहा है कि उनके लिए संगठित समूह की शक्ति ही राजनीति है, इसलिए उन्हों ने बीजेपी को चुना है। उनका राजनीति में आने का मकसद सेवा भाव है और वे नरेंद्र मोदी के विजनरी नेतृत्व से भी प्रभावित हैं।

कल्पना ने कहा कि नरेंद्र मोदी जी के लाखों-करोड़ों फॉलोवर्स हैं। उनकी लीडरशिप क्वालिटी कमाल की है। मुझे लगा कि अगर अभी मैं उनकी छत्रछाया में नहीं आयी, तो मैं इस उपलब्धि को नहीं जी पाऊंगी। लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर कल्पना ने कहा कि अभी ऐसा कोई इरादा नहीं है। मैं सेवाभाव से जुड़ी हूं। ये अभी दूर की बात है। मैं बीजेपी के लिए पहले भी गाना गा चुकी हूं, हालांकि तब ये प्रोफेशनल तरीके से था। भोजपुरी गायिका ने कहा कि मुझे लगता है कि बिहार मेरे लिए मंदिर के समान है और छठ मईया ने मुझे इस धरती से चुना है।

कल्पना ने कहा कि लोक संस्कार से भरे गीत-संगीत के जरिये बिहार से जुड़ी हूं। इसी संदर्भ में मेरा परिचय बिहार से हुआ है। मेरा बिहार से परिचय लोक गीतों की वजह से है। आज बीजेपी से जुड़ी हूं। यह मेरे संगीत के सफर का विस्तार ही है। मैं असम से हूं। वहां मैं भूपेन हजारिका को अपना आदर्श मानती हूं और बिहार के भिखारी ठाकुर मेरे इंस्पेरेशन हैं।

39 वर्षीया कल्पना पटवारी का जन्म असम के बारपेटा में हुआ था और वे इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएट हैं। कल्पना पटवारी ने लखनऊ से संगीत विशारद भी कर रखा है। कल्पना पटवारी ने लोक संगीत की शिक्षा अपने पिता बिपिन बटवारी से ली है जो खुद भी एक लोक गायक थे। कल्पना पटवारी को पूर्वी, कजरी, सोहर, विवाह गीत, चैत और नौटंकी गायकी में महारत हासिल है। कल्पना पटवारी ने भिखारी ठाकुर पर भी खूब काम किया है। कल्पना पटवारी बॉलीवुड में भी अपनी गायकी के हाथ दिखा चुकी हैं।

भोजपुरी म्यूजिक को बुलंदियों पर पहुंचाने वाली सिंगर कल्पना पटवारी ने कोक स्टूडियो में लोक गीत ‘बिरहा’ का आधुनिक संगीत के साथ ऐसा फ्यूजन किया था कि ये सॉन्ग जमकर हिट हुआ। सोनिया सहगल के साथ कल्पना पटवारी की जुगलबंदी को खूब पसंद किया गया था, और इस वीडियो को अभी तक यूट्यूब पर लगभग 22 लाख बार देखा जा चुका है। जुदाई और दर्द का गीत है, लेकिन उसे उन्होंने आधुनिक टच दे दिया है। ‘बिरहा’ परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाने का श्रेय कल्पना पटवारी को ही जाता है।

कल्पना पटवारी असम की रहने वाली लोक गायिका हैं और उन्होंने उस्ताद गुलाम मुस्तफा से संगीत की शिक्षा ली है। कल्पना पटवारी की आवाज कमाल है, और उन पर भूपेन हजारिका का काफी प्रभाव माना जाता है। कल्पना ने भोजपुरी संगीत को अलग पहचान दिलाई और उन्होंने अश्लीलता से कोसों दूर ले जाकर खुद के साथ ही भोजपुरी संगीत को भी एक नये मुकाम पर पहुंचाया। कल्पना को ‘भोजपुरी क्वीन’ भी कहा जाता है। कल्पना पटवारी चार साल की उम्र से ही परफॉर्म कर रही हैं।

Source: Live Bihar

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