सोमवार, 16 अप्रैल को कोलकाता में आयोजित भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की तकनीकी समिति की बैठक के दौरान निर्णय लिया गया की रणजी ट्रॉफी 2018-19 सीजन में प्री-क्वार्टर फाइनल और बिहार को शामिल किया जा सकता है। इस मीटिंग में किये गए फैसलों में ये दो फैसले काफी अहम् हैं। समिति ने टूर्नामेंट को होम-अवे प्रारूप आधार के रूप में ही रखने का फैसला किया है।

लंबे वक्त से बीसीसीआई के सिस्टम से बाहर रहने के चलते बिहार के क्रिकेटरों के लिए रणजी ट्रॉफी में खेलने का रास्ता तो खुल रहा है. सौरव गांगुली की अगुवाई वाली बीसीसीआई की टेक्निकल कमेटी ने बिहार को फिर से रणजी ट्राफी में बहाल करने का फैसला तो लिया है साथ पूर्वोत्तर के राज्यों को 2018-19 से इस नेशनल चैंपियनशिप में शामिल करने की सिफारिश की है.

पूर्वोत्तर राज्यों ने पिछले सत्र में बीसीसीआई अंडर-19 टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था क्योंकि बोर्ड उन्हें धीरे धीरे अपनी व्यवस्था में लेना चाहता है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट की बनाई प्रशासकों की समिति चाहती थी कि इस सीजन से बिहार को रणजी ट्रॉफी का हिस्सा बनाया जाए, जबकि टेक्निकल कमेटी का मत था कि बिहार को पहले अंडर 16, अंडर-19 जैसी चैंपियनशिप्स के जरिए सिस्टम में सामिल किया जाए.

टेक्निकल कमेटी को आशंका है कि अगर बिहार को शामिल किया गया तो फिर पूर्वोत्तर के राज्य इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं. लिहाजा टेक्निकल कमेटी ने अंतिम फैसला सीओए पर छोड़ते हुए पूर्वोत्तर राज्यों की भी सिफारिश कर दी है.


18 साल से राष्ट्रीय चैंपियनशिप रणजी में वापसी की लड़ाई लड़ रहे बिहार को आखिर खुशखबरी मिल गयी है। सौरभ गांगुली की अगुवाई वाली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की तकनीकी समिति ने सर्वसम्मति से बिहार को फिर से रणजी ट्रॉफी 2018-19 सत्र में शामिल करने की सिफारिश कर दी है।

बीसीसीआई की तकनीकी समिति ने अपनी बैठक में बिहार को रणजी ट्रॉफी 2018-19 सत्र शामिल करने के अलावा और भी कई सिफारिशें की हैं जिसमें सबसे महत्वपूर्ण रणजी ट्रॉफी में प्री क्वार्टरफाइनल की शुरुआत है।

तकनीकी समिति ने अपनी सिफारिश में कहा कि रणजी ट्रॉफी में 2018-19 सत्र में चार ग्रुप होंगे और मैच होम एंड अवे आधार पर खेले जाएंगे जबकि नए सत्र से प्री क्वार्टरफाइनल की शुरुआत हो जाएगी

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बीसीसीआई के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी ने एक बयान में बताया कि तकनीकी समिति ने सर्वसम्मति से बिहार को रणजी ट्राफी 2018-19 सत्र में शामिल करने की सिफारिश की है।

हालांकि समिति को लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के 18 जुलाई 2016 के फैसले के मद्देनजर पूवोर्त्तर के एसोसिएट और सम्बद्ध सदस्यों पर भी विचार किया जाना चाहिए। तकनीकी समिति की सिफारिशों को बीसीसीआई का संचालन देख रही प्रशासकों की समिति (सीओए) के पास भेजा जाएगा और फिर इसे बीसीसीआई की आम सभा में मंजूरी दी जायेगी।

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