मुंगेर की बेटी मीनाक्षी सिन्हा ने आइंस्टीन की लाइट थ्योरी को चैलेंज किया है. आइंस्टीन ने अपने शोध में कहा था कि प्रकाश की गति नहीं बढती है जबकि 11वीं की छात्रा मीनाक्षी का दावा है कि प्रकाश की गति को बढ़ाया जा सकता है. मीनाक्षी ने कहा कि इस दिशा में उसे सफलता भी मिली है.

मीनाक्षी के इस शोध पर नासा और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने भी मुहर लगाई है. फिलहाल मीनाक्षी डार्क इनर्जी और ब्लैक होल्स के रहस्यों को लेकर नासा के साथ काम रही है. नासा ने 2014 में पूरी दुनिया से 20 जुनियर साइंटिस्ट का चयन किया था जिसमें मीनाक्षी भी शामिल थी. नासा हरेक 10 सालों पर विश्वभर के इस तरह के जूनियर साइंटिस्ट का चयन करता है.

मीनाक्षी ने अपने इस शोध से मु्ंगेर का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है. मीनाक्षी सिन्हा फिलहाल जिले के बीआरएम कॉलेज की 11वीं की छात्रा हैं. मीनाक्षी को कैब्रिंज यूनिवर्सिटी से भी पढ़ाई के साथ रिसर्च करने का ऑफर है.

मीनाक्षी मुंगेर जिले के सुभाष नगर मोहल्ले की रहने वाली है. मीनाक्षी के पिता मुकेश कुमार सिन्हा एक योग शिक्षक और माता संध्या वर्मा जुवेनाइल बोर्ड की सदस्या हैं. मीनाक्षी दो बहनें हैं. मीनाक्षी की शुरुआती शिक्षा नॉट्रोडेम स्कूल से हुई है और फिलहाल इंटर की पढ़ाई बी.आर.एम महिला कॉलेज से कर रही है.

मीनाक्षी छोटी उम्र से ही अपनी सोच से आइंस्टीन के प्रकाश की गति के सिद्धांत को चुनौती दे रही है. वही मीनाक्षी की मां संध्या वर्मा की सोच है वो भारत की बेटी बनकर दुनिया में नाम कमाये.

मीनाक्षी जब सातवीं कक्षा में थी तभी से इस विषय पर सोचना शुरू कर दिया था. वर्ष 2012 में भाभा को अपने रिसर्च की थ्योरी भेजी जिसे भाभा ने वर्ष 2013 में उस थ्योरी को नासा में भेज दिया और नासा ने भी मीनाक्षी विलक्षता प्रतिभा को देखते हुए दो वर्षो की पढाई के लिए ऑफर दिया था.

नासा ने 20 टॉप जूनियर वैज्ञानिक की सूची में शामिल किया है. इसके अलावा मीनाक्षी को वर्ष 2014 में बेस्ट कॉस्मोलीगल अवार्ड से सम्मानित किया गया है और वर्ष 2015 में नासा ने ओनर सर्टिफिकेट से सम्मानित किया है. मीनाक्षी इस उपल्बधि में उसके दादा और पूरे परिवार के लोग काफी गर्व महसूस हो रहा है.

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