बिहार की 35 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में, केंद्र ने हर संभव मदद का किया ऐलान

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बिहार में बीते 24 घंटे से उत्तर बिहार में हो रही तेज बारिश व नेपाल से छोड़े गए पानी के कारण बाढ़ की स्थिति भयावह हो गई है। उत्तर बिहार के 40 प्रखंडों की लगभग 35 लाख की आबादी बाढ़ से घिरी हुई है।

दरभंगा के घनश्यामपुर से एक बड़ी खबर आ रही है जहां बांध टूटने से कगांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। हालात बेहद खराब हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि रात भर ग्रामीणों ने बांध को बचाने के लिए जद्दोजहद करते रहे।

लेकिन मौके पर कोई अधिकारी नहीं पहुंचे। जिसकी वजह से हालात बिगड़ गए। इसके पहले कल डीएम ने मीटिंग करके कहा था कि बाढ़ नियंत्रण में जो भी अधिकारी लापरवाही बरतेंगे उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।




बांध के टूटने से ग्रामीणों में खासा आक्रोश है। लोगों के सामने खाने के भी लाले पड़ गए हैं। लोग जान बचाने के लिए गांव छोड़कर जा रहे हैं। उधर दरभंगा शहर भी पानी में डूब गया है।

मुख्य सड़कों समेत हर मोहल्लों में घुटना भर पानी लगा है। शनिवार की रात में हुई बारिश ने पूरे शहर को डूबो दिया वैसे इसकी शुरुआत चार दिन पूर्व ही हो चुकी थी। लगातार हो रही बारिश ने लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर भारी तबाही मचा दी है।




शहर की सड़कों व बाजारों में पानी जमा रहने से सन्नाटा पसरा हुआ है। शहरवासियों ने एक माह बाद फिर से बारिश का कहर झेलने को मजबूर है।

अल्लपट्टी के प्रकाश सिंह, नाका छह की मोना, दोनार के मनीष समेत एक दर्जन से अधिक लोगों ने कहा कि एक माह में जिला प्रशासन व निगम प्रशासन ने क्या किया। वो किसी से छिपा नहीं है। शहरवासियों में उबाल है।




वहीं, जो सड़कों पर निकल रहे हैं, उन्हें भी जलजमाव से दो-चार होना पड़ रहा है। बारिश का सबसे ज्यादा असर शहर के निचले इलाकों में पड़ा है। दर्जन भर से अधिक मोहल्ले झील तो हर घर टापू में तब्दील हो चुका है। पूरे शहर का आलम यह है कि जिधर देखो वहीं पानी- ही -पानी है।

राज्य सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना की मदद मांगी थी। इस सिलसिले में प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात की और बाढ़ के हालात का जायजा लिया। प्रधानमंत्री ने बिहार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है। दूसरी ओर सीएम नीतीश कुमार आज बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण कर रहे हैं। उनके साथ मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह भी मौजूद हैं।




नीतीश पटना वापस 4 बजे तक लौट जाएंगे। राज्य के सीमांचल के एक दर्जन जिलों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। किशनगंज और अररिया जिले की स्थिति सबसे बदतर हो गई है। दोनों शहर में तीन से चार फीट पानी बह रहा है। राज्य सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना की मदद मांगी है।

दूसरी ओर सीएम नीतीश कुमार आज बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि दानापुर और रांची आर्मी बेस से बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रभावित इलाकों में सेना को कूच करने का अनुरोध किया गया है।




जानकारी के मुताबिक अपराह्न चार बजे कॉलम कमांडर कैप्टन अमृतपाल सिंह खेरा के नेतृत्व में दानापुर आर्मी के 80 जवान व अधिकारी किशनगंज रवाना हो गये।

बकौल मुख्य सचिव, बाढ़ प्रभावित किशनगंज, अररिया और पूर्णिया के इलाकों में पहले से ही मौजूद एसडीआरएफ की टीम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गई है। केन्द्र सरकार से एनडीआरएफ की 10 टुकड़ियां मांगी गयी हैं। भुवनेश्वर से चार टुकड़ी किशनगंज व पूर्णिया के लिए रवाना हो गई है।




पूर्णिया के बायसी प्रखंड के कदमसाड़ी में फंसे करीब 200 लोगों को हेलीकॉप्टर से बाहर निकालकर कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य आरंभ हो गया है। मुख्य सचिव ने कहा कि नेपाल और कोसी तथा सीमांचल के इलाकों में अत्यधिक वर्षा से आयी बाढ़ में फंसे लोगों को निकालना राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता है।

इधर, मुख्यमंत्री ने उच्चधिकारियों के साथ आपात बैठक की और प्रभावित जिलों के प्रभारी सचिवों को तत्काल हवाई मार्ग से अपने-अपने जिले में पहुंच कर वहां कैंप करने का निर्देश दिया। साथ ही आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ में फंसे लोगों को वहां से निकालकर जल्द सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं। युद्ध स्तर पर बचाव और राहत कार्य चलाएं।




उन्होंने कहा कि आर्मी को अलर्ट किया गया है। जरूरत होने पर उनकी भी मदद ली जाएगी। बाढ़ की भयावहता के मद्देनजर सीएम नीतीश कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्री अरुण जेटली से फोन पर बात की। बाढ़ की स्थिति की जानकारी दी और सभी तरह की सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

सीएम ने एनडीआरएफ की दस अतिरिक्त टुकड़ियां व वायुसेना के हेलीकॉप्टर मांगे। सीएम को हर संभव मदद देने का आश्वासन मिला। सीएम आज बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। इस दौरान वे बाढ़ की स्थिति और बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में चलाए जा रहे बचाव एवं राहत कार्यों का जायजा लेंगे। विशेषकर किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार में उत्पन्न स्थिति को देखेंगे।




4.85 लाख क्यूसेक पानी वाल्मीकिनगर गंडक बराज से रविवार को छोड़े जाने से स्थिति और विकराल हो गई है। अररिया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, पूर्वी चंपारण, प. चंपारण, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी में स्थिति गंभीर है। उत्तर बिहार और बंगाल में बाढ़ के कारण किशनगंज-सिलीगुड़ी-रेल मार्ग ठप हो गया है।




इसके साथ ही पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को शेष भारत से रेल संपर्क टूट गया है। कटिहार से सिलिगुड़ी के मध्य रेल ट्रैक पर कई जगह पानी आ जाने की वजह से 18 से ज्यादा रेलगाड़ियों को रविवार को रद्द करना पड़ा है। पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ राजेश कुमार ने कहा कि पूर्वोत्तर से शेष भारत की रेल सेवा बाढ़ के कारण ठप हो गई है।







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