देश-विदेश से आते हैं लोग बिहार में डॉल्फिंस देखने, यहाँ है देश का एकमात्र गांगेटिक डॉल्फिन सेंचूरी

खबरें बिहार की

लुप्‍तप्राय घोषित की जा चुकी गंगा की डॉल्फिनों से भरा एक प्रमुख आकर्षण है बिहार में विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन सेंचूरी। इसमें डॉल्फिंस के साथ मीठे पानी वाले कछुए और 135 अन्‍य प्रजातियों के जीव भी पाए जाते है।

पूरी दुनिया में गांगेय डाल्फिनों की एक मात्र प्रजनन स्थली के रूप में मशहूर ये विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन सेंचूरी विश्व में मौजूद चार बड़े सेंटरीज़ में से एक है। अक्टूबर से लेकर जून तक गंगा नदी में डॉल्फिन को देखने का अच्छा समय होता है। डॉल्फिन को बरारी गंगा घाट से भी देखा जा सकता है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2009 में डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव का दर्जा देने के साथ ही डॉल्फिन को नुकसान पहुंचाने या इसके शिकार पर सरकार ने रोक लगा दी है।

1991 में सुल्तानगंज से लेकर कहलगांव तक के 50 किलोमीटर गंगा नदी के क्षेत्र को डॉलफिन सेंचूरी एरिया का दर्जा मिला। अपने आप में इस अनोखे सेंचुरी में इन गांगेस डाल्फिनों को स्वच्छंद कलरव करते हुये तो देख ही सकते हैं, साथ ही शर्दियों में ये क्षेत्र लगभग 100 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी परिंदो का एक मुख्य बसेरा बन जाता है।

यहां कई प्रकार की माईग्रेटरी बतखों जैसे, पिंटेलडक, पोचार्ड, सुर्खाव, मतार्ड, गडबाल आदि का विशेष रूप से अध्ययन एवं अवलोकन किया जा सकता है। स्थानीय पक्षियों में विसलिंग टील, अधंगा, हेरांन, पनकौओं, डार्टर, किंगफिशर, चीलों भी भारी संख्या में यहाँ रहते हैं।

 

 

वन संरक्षक संजय कुमार सिन्हा ने बताया कि इस समय सेंचुरी में करीब 300 डॉल्फिन है और इन पर शोध का काम भी चल रहा है। उन्होंने कहा कि सेंचूरी एरिया के विकास के लिए डॉल्फिन म्यूजियम बनाने का मैनेजमेंट प्लान पर काम हो रहा है।

राष्ट्रीय जल जीव घोषित यह डाल्फिन लुप्त हो रही है। इस दुर्लभ प्रजाति की गांगेय डाल्फिन को स्थानीय भाषा में ‘सोंस’ कहते है जो पूरे दक्षिण एशिया में पायी जाने वाली मीठे पानी की डाल्फिनों की चार प्रजातियों में से एक है।

 

 

अन्य तीन प्रजातियां में उड़ीसा के महानदी में पायी जाने वाली ईरावली डाल्फिन, सिंधु नदी में पायी जाने वाली इंडस रिवर डाल्फिन तथा चीन की यांग्तजे कयांग नदी में पायी जाने वाली यांग्तजे-क्यांग डॉल्फिन हैं।

वर्ष 2007 के बाद यांग्तजे-क्यांग डाल्फिनों के देखे जाने की रिपोर्ट बन्द हो जाने पर आशंका जताई गई कि अब ये विलुप्त हो चुकी है। साथ ही मीठे पानी की डाल्फिनों के दूसरी प्रजातियों भी लुप्तप्राय हो गई हैं।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.