नमामि गंगे – एक व्यंग ऐसा भी।

छठ उपरान्त घाटों की स्तिथि

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गुरुद्वारा घाट, दानापुर

बीते महीने ही हमारा शहर बम्बई की तरह एक महानगर के रूप में उभर कर पूरे भारतवर्ष में चर्चा का विषय बना रहा। जलजमाव में अव्व्ल स्थान ला, हमने खूब वाह-वाही बटोरी। नवरात्र के समय, जो व्रती नहीं थे, उन्हें भी व्रत रखना सिखाया, चाहे वह व्रत अन्न-जल न ग्रहण करने का हो या दवाइयाँ न लेने का हो। हाँ, पर कुछ सिर-फिरे लोगों और संस्थाओं ने सरकार के ऐसे शुभ कार्य में बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की और सफ़ल भी हो गए, पर सरकार अपने कार्य में लगी रही । सरकार ने हर दिशाओं से वाह-वाही बटोरी, पर न हमें न हमारी सरकार को, इतनी सी वाह-वाही पचती है। इसीलिए हमें जब भी मौक़ा मिलता है, हम और वाह-वाही पाने की ईक्षा लिए कुछ ऐसा कर गुज़रते हैं, जिसकी उम्मीद हमसे नहीं की जाती।

अब आप छठ महापर्व को लेकर जनता और सरकार की साझेदारी को ही देख लें। जिस तरह से छठ से पूर्व सभी घाट सुंदर और स्वच्छ थे, ठीक उसी प्रकार छठ के उपरांत भी, या यूँ कहें गंगा स्नान के बाद भी सारे घाट उतने ही सुंदर और स्वच्छ छोड़ दिए गए हैं। वैसे भी पूजा समितियों से जितनी उम्मीद रखनी चाहिए, वो उससे कुछ कम कार्य ही करते हैं, पर हमारे नगर परिषद और निगम उम्मीद से कम से कम ढाई गुणा ज्यादा ही कार्य करते हैं।
पूजा पूर्व, कचरे और प्लास्टिक की थैलियाँ, जिस प्रकार घाट की शोभा में चार चाँद लगा रहे थे, शायद वैसी चमक ना दिखने पर ही, घाट पर आये हम श्रद्धालूओं ने पूजा उपरांत, अपना कर्तव्य निर्वहण करते हुए घाट को फिर वैसे ही स्वछ और सुंदर बना दिया और अपने घर को लौट गए। अब यहाँ से, वैसे भी नगर निगम की ज़िम्मेदारी शुरु होती थी, और उसने अपनी ज़िम्मेदारी बख़ूबी निभाई भी। हमने जिस प्रकार पूजा पूर्व घाटों को स्वच्छ और सुंदर छोड़ा, निगम ने उसी क्षण से अपने दायित्वों का वहन करते हुए, उनको वैसे ही सुदंर और स्वच्छ बनाये रखा। हाँ, पटना के कुछ बड़े घाटों की बात अलग थी, जैसे गांधी घाट, ऐन.आई.टी घाट इत्यादि, जिनकी स्वच्छता पर कोई जोड़ नही दिया गया, क्योंकि सरकार जवाब माँगेगी, तो कुछ तो दिखाने को होगा न। वैसे भी सरकार तो बस छोटे घाटों पर ही तो अपनी निगाहें जमाए रखती है जैसे की दानापुर के कई घाट।


अब पूरे एक वर्ष तक ऐसी स्वच्छ्ता बनाये रख, हम अगले वर्ष फिर महापर्व की आस्था में डूब 3-4 दिन स्वच्छता भूल, पर्व उपरांत फिर स्वच्छ्ता को गले लगा लेंगे। और बस इसी तरह, “नमामि गंगे” का जाप करते हुए हम फिर आगे बढ़ जाएँगे और हमारी सरकार भी, वो सरकार चाहे निगम स्तर की हो या राज्य स्तर की।
जय गंगा मैया।
राजीव शेखर ( एक ‘ग्रेटर पटना’ वासी! )

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