पैर से लिखकर प्रथम श्रेणी से पास किया मैट्रिक परीक्षा, तीन साल की उम्र में कट गए थे दोनों हाथ

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शहर के आरएसके विद्यालय में नामांकन कराने के बाद उसने पढ़ाई जारी रखी। इधर, नंदलाल ने कहा कि बेहतर परीक्षा परिणाम की उम्मीद पहले से थी। नंदलाल ने कहा कि परीक्षा परिणाम से मेरा हौसला बढ़ा है।

मैं और मेहनत करूंगा और आइएएस बन कर देश समाज का नाम रौशन करूंगा।

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