धोती-कुर्ता, लंहगा से लेकर बिंदी तक, बिहार की पहचान हैं ये परिधान…

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पुरानी कहावत है ‘पांच कोस प पानी बदले, दस कोस प वाणी’। पानी व वाणी के साथ – साथ विविधताओं से भरे भारत देश में लोगों का पहनावा भी अलग-अलग तरह का देखने को मिलता है। दूसरे राज्यों की तरह बिहार की भी अपनी पारंपरिक वेशभूषा है। बात चाहे दरभंगा की करें या गया जिले की यहां के सभी जिलों में लोगो द्वारा खास मौकों पर पहने जाने वाले पारंपरिक कपड़ों हमेशा आकर्षक लगते हैं। देशभर में तेजी से फैलते पश्चिमी तौर-तरीकों से जुड़े पहनावे के बावजूद बिहार की अपनी पारंपरिक ड्रेस का कोई जवाब नहीं है।


लहंगा, पायजमा – कुर्ता या धोती कुर्ता
बिहार ऐसा राज्य है जहां पर्व-त्योहारों में लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में रहना पसंद करते हैं। भाई-बहन का प्रसिद्ध त्योहार ‘रक्षाबंधन’ व ‘भाईदूज’ में बहने आमतौर पर ‘लहंगे’ में नजर आती हैं। इसके विपरीत भाई ‘पायजामा-कुर्ता’ या ‘धोती-कुर्ता’ में नजर आते हैं। लोक आस्था का महापर्व ‘छठ’ में महिला व्रती ‘चुनरी साड़ी’ पहनती हैं।
हालांकि पुरुष व्रती ‘धोती व बनियान’ पहनकर छठ माता की आराधना करते हैं। सुहागनों का प्रमुख त्योहार ‘तीज’ में महिलाएं अपने हाथों में मेहंदी जरूर लगवाती हैं। चाहे दीपावली का त्योहार हो चाहे होली का लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में ही नजर आते हैं।

शादी-ब्याह का पहनावा

शादी-ब्याज में तो यहां कि महिलाओं और पुरूषों का पहनावा देखते ही बनता है। महिलाएं किस्म -किस्म के गहने पहनकर बेहद ही खूबसूरत नजर आती हैं। कानों में ‘बाली’,ललाट पर ‘बिंदी’ दोनों हाथों में ‘चुड़ियां’ व पांव में पायल और बिछिया महिलाओं की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। अपने आप को आकर्षक दिखाने के लिए पुरुष भी पीछे नहीं रहते हैं।
चुड़ीदार पायजामा व कुर्ता पहन वे कपड़ों पर किस्म-किस्म के सुगंधित इत्र व सेन्ट लगाते हैं।

ग्रामीण इलाकों की वेशभूषा
ग्रामीण इलाकों की महिलाएं अपनी बांह या कलाई पर टैटू लगवाती हैं, जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘गोदना या गुदवाना’ कहा जाता है। पटना व गया जिले के ग्रामीण इलाकों के लोग अपने माथे पर ‘पगड़ी’ व कानों में ‘कुंठल’ पहन बेहद ही पारंपरिक नजर आते हैं।

मिथिलांचल का अलग पहनावा
मिथिलांचल की पहचान वहां के परिधानों से होती है। वहां के पहनावे लोगों को खूब भाते हैं। उनके पहनावे में सिर पर ‘पाग’ व धोती-कुर्ता के साथ गमछा भी शामिल रहता है। मिथिलांचल में शादी की रस्म के दौरान वर को धोती-कुर्ता पहनाने का प्राचीन रिवाज रहा है।
वहां के युवक बारात निकलने के समय भले ही शेरवानी व कोर्ट पैंट पहनते हों, लेकिन जब वे शादी के मंडप में पहुंचते हैं तो वह पारंपरिक धोती कुर्ता ही पहनते हैं। मिथिलांचल के बेहद ही आकर्षक वेशभूषा की झलक मशहूर मिथिला पेंटिंग में भी नजर आती है।

बिहार अपनी परम्पराओं की वजह से देश-विदेश में अलग पहचान रखता है। अपनी इस कड़ी में हमने यहाँ की पारंपरिक वेशभूषा की चर्चा की। हमारी कोशिश आगे भी आपको बिहार की हर वो खास चीज से रूबरू कराने की होगी जो यहां की पहचान है।

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