बिहार सरकार का बड़ा फैसला, प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की आधी सीटों पर सरकारी जितना होगा फीस

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Patna: भारत में बहुत सारे मेडिकल कॉलेज है. उसमें से कई मेडिकल कॉलेज प्राइवेट है और कुछ सरकारी. भारत के प्राइवेट कॉलेजों में अत्‍यधिक फीस के कारण मेडिकल सीटें पाना मुश्किल होता है. सरकारी कॉलेजों में प्राइवेट कॉलेजों के मुकाबले कम फीस है. इसी क्रम में बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस में कटौती का मामला उठा. फीस को लेकर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग करता है और उसके द्वारा गठित कमेटी बच्चों की फीस तय करती है. उन्होंने बताया कि निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में 50 फीसदी छात्रों से सरकारी मेडिकल कालेजों के बराबर फीस लेने का प्रावधान किया गया है, जो अगले वर्ष से लागू होगा. कोई भी संस्था कैपिटेशन फीस नहीं वसूल सकती है.

उन्होंने कहा कि राज्य में एम्स, ईएसआईसी बिहटी समेत 12 मेडिकल महाविद्यालय संचालित हैं और अगले तीन चार साल में यह संख्या 24 हो जाएगी. प्रश्नकर्ता डा. संजीव कुमार ने इसे गंभीर विषय मानते हुए हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने का सुझाव दिया है. ध्यानाकर्षण पर नीतीश मिश्रा समेट पक्ष- विपक्ष के कई सदस्यों ने हस्तेक्षेप करते हुए सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया. विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इस गंभीर विषय पर सरकार की सजगता और गंभीरता दिख रही है. सराहना की कि मुख्यमंत्री नरेद्र मोदी के प्रयासों के बाद छात्र सकुशल युक्रेन से वापस आ रहे हैं.

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि राज्य की पांचों आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल जल्द चालू होंगे एक में पढ़ाई हो रही है. दूसरे बेगूसराय में अगले सत्र से पढ़ाई शुरू हो गई. शेष को भी जल्द चालू किया जाएगा. इसके लिए सरकार ने एक साथ 840 करोड़ की मंजूरी एक ही कैबिनेट की बैठक में दी है. यह देश में एक मिसाल है. मंत्री ने कहा कि कई सालों से केवल पटना के राजकीय आयुर्वैदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल में पढ़ाई हो रही थी. दरभंगा के आयुर्वेद कॉलेज में पढ़ाई इसी सत्र से शुरू करने का प्रयास हो रहा है.

सीएम नीतीश ने कहा- अमीर राज्यों के बच्चे भी जाते हैं पढ़ने

यूक्रेन में छात्रों के मेडिकल की पढ़ाई को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन में कहा कि मेडिकल कॉलेज में पढ़ने के लिए बच्चे वहां जा रहे हैं, यह किसी को मालूम नहीं था. यह तो वास्तव में नेशनल लेवल पर सोचना होगा. उन्होंने कहा कि जो भी कम्पटीशन होता है, नेशनल स्तर से होता है. बाहर जाने के लिए कोई परीक्षा नहीं देनी होती है. सिर्फ बिहार के बच्चे पढ़ने नहीं गए हैं, अमीर राज्यों के बच्चे भी वहां पढ़ने गए हैं.

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