भोजपुर के देव वरुणार्क में 22 साल बाद अवतरित होंगे सूर्यदेव

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भोजपुर के तरारी में राजा समुद्रगुप्त के बसाये प्राचीन गांव देव (वरुर्णाक) में इस साल छठ पर अद्भुत संयोग बना है। यहां स्थापित सूर्य मंदिर में 22 साल बाद भगवान भास्कर अवतरित होंगे। तहखाने से कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को सूर्य की मुख्य पाषाण प्रतिमा निकाल नवनिर्मित सूर्य मंदिर में स्थापित होगी। प्रतिमा को एक थान मलमल का वस्त्रत्त् धारण कराया जायेगा। सारथी अरुण व सात घोड़ों से युक्त रथारूद्र दिव्य और पावन विग्रह अत्यंत दर्शनीय व मनोहारी होगा। वर्ष 1999 के बाद पहली बार लोग इस दुर्लभ पल का साक्षी बनने को बेताब हैं। छठ पर व्रतियों व श्रद्धालुओं की दर्शन की अभिलाषा पूरी होगी। उनके नयन भी तृप्त होंगे, जिन्हें अब तक इस भव्य विग्रह का दर्शन नहीं हो सका है। इसे लेकर गांव में उत्साह है। सात दिनों (30 अक्टूबर से पांच नवंबर) तक आयोजित इस उत्सव की महत्ता के पर्चे छपे हैं। तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

मुगल काल में मूर्तिभंजकों के भय से बने तहखाने में रहते हैं सूर्य डॉ. त्रिपुरारी नंदन पांडेय बताते हैं कि मुगल काल में मूर्ति भंजकों के भय से तहखाना बना पाषाण प्रतिमाओं को छिपाया गया था। यहां खुदाई में सिर रहित भगवान सूर्य समेत कई खंडित प्रतिमाएं मिलीं। मुख्य प्रतिमा सुरक्षित है। तब से सूर्य तहखाने में ही रहते हैं। जब अद्भुत संयोग बनता है, तभी कार्तिक की षष्ठी तिथि को प्रकाट्य होते हैं। एकादशी को अंतरध्यान हो जाते हैं। गांव में 2014 में बहू बन आयी प्रियंका देवी और 2020 में बहू बनी आरती देवी को पहली बार आये इस दुर्लभ पल का इंतजार है। विवाहित बेटी प्रियंका कुमारी मायके आयी है। उसकी ससुराल वाले भी सुखद संयोग सुन प्रफुल्लित हैं और दर्शन को आने की तैयारी में हैं।

भोजपुर के देव वरुणार्क में नागर शैली में निर्मित प्राचीन सूर्य मंदिर के ध्वंसाशेष, जहां सूर्यदेव की खंडित प्रतिमा का सिर बना स्थापित कराया गया है।

कब बनता है अद्भुत संयोग

गांव के करीब 40 ब्राह्मण परिवारों में जिस साल कोई मृत्यु नहीं होती है और छठ के समय किसी के घर में बच्चा नहीं होता है। यानी किसी तरह का अमंगल या छुतिका नहीं होने पर ही ऐसा अद्भुत संयोग बनता है। इसके पूर्व 1999 में ऐसा संयोग बना था। 76 वर्षीय रिटायर शिक्षक सुदेश कुमार लाल बताते हैं कि उनके होश में यह चौथी बार संयोग बना है। 1972 में भी उनकी पहल पर गांव के अधिकृत ब्राह्मण परिवारों ने भगवान सूर्य का प्रकाट्य कराया था

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