बिहार की इस Corona Warrior ने 77 दिनों से नहीं देखा घर का मुंह, फोन पर लेती हैं हालचाल

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पूरे देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को परास्त करने में वॉरियर्स लगे हुए हैं. ऐसी ही एक कोरोना वॉरियर हैं- डॉ. अपर्णा झा . डॉ. झा अपने घर से दूरी बनाकर कोरोना संक्रमितों को बचाने में लगी हैं. अब तक 29 संक्रमितों की चेन से जुड़े 700 से ज्यादा लोगों की जांच पड़ताल कर उनका स्वाब सैंपल पटना भेज चुकी हैं. डॉ. अपर्णा इन​ दिनों अपने घर से सिर्फ हालचाल पूछने भर का संबंध रखा हुआ है. वे पिछले 77 दिनों से घर नहीं गई हैं. वह अपनी इकलौती बेटी और परिवार के दूसरे सदस्यों से सिर्फ मोबाइल पर ही बात कर पाती हैं.

77 दिनों से नही देखा घर के लोगों का चेहरा
भोजपुर जिले में वैश्विक महामारी कोरोना की चेन तोड़ने में जिले के स्वास्थ्य महकमें से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की टीम पूरे तनमन से लगी है लेकिन एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अर्पणा झा इस अभियान मे रात-दिन का फर्क मिटा चुकी हैं. डॉ. अपर्णा झा पटना की निवासी हैं. उन्होंने पिछले 77 दिनों से भी ज्यादा समय से अपने बाल बच्चों का मुंह तक नहीं देखा है.
यहां दो कोरोना संदिग्धों की हो चुकी है मौत

न्यूज़18 से हुई बातचीत के क्रम में उन्होंने बताया कि भोजपुर में कोरोना के पहले संक्रमित मरीज की पुष्टि 19 अप्रैल को हुई थी पर इससे पहले 02 अप्रैल एवं 08 अप्रैल को भोजपुर में हुई कोरोना के 02 संदिग्ध मरीजों की मौत के बाद से पूरे भोजपुर में स्वास्थ्य महकमें से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक की परेशानियां काफी बढ़ गई थीं. हालांकि संदिग्ध कोराेना मरीज की जांच रिपोर्ट बाद में निगेटिव आई थी. इसके बाद बक्सर जिले के नया भोजपुर के संक्रमितों की चेन से जुड़े संदिग्धाें की तलाश में भी दोनों टीम के पसीने छूट गए थे. हालांकि इस चेन से जुड़े सभी रिपोर्ट भी निगेटिव मिले थे लेकिन 19 अप्रैल को यूपी के बड़हरा आए युवक का पहला संक्रमित केस मिलने के बाद यहां लगातार संक्रमित मरीज मिलने लगे जिसके बाद उनकी व्यस्तता बढ़ गई और घर जाने का मौका ही नही मिला. हालांकि आरा से पटना की दूरी बहुत ज्यादा नही है.


एक समय तो ऐसा भी देखने को मिला जब अधिकांश पुलिसकर्मी और मेडिकल स्टाफ तक को क्वारंटाइन करने की नौबत आ गई. इन तमाम गतिविधियों में सभी मेडिकल स्टाफ तथा प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी भले ही संभव नहीं हो पाई हो, पर कोरोना जंग के मोर्चे पर जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अर्पणा झा पीपीई किट से लैस होकर रात दिन आपने काम में तनमन से लगी रही, जिसकी चर्चा मेडिकल स्टाफ और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच अक्सर हुआ करती है. हालांकि डॉ. झा इस कार्य के लिए प्रशासनिक अधिकारियों में जिलाधिकारी रौशन कुशवाहा, एसपी सुशील कुमार, सिविल सर्जन डॉ. एलपी झा, सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सतीश कुमार सिन्हा, सदर एसडीओ अरुण प्रकाश समेत कई अधिकारियों की भूमिका की सराहना करने से नहीं थकती.

दो मार्च से भोजपुर में ड्यूटी पर हैं तैनात
डॉ. अपर्णा ने बताया कि विदेश से आया पहला केस मिलने के बाद से ही हमलोगों की ट्रेनिंग शुरू हो गई थी. ट्रेनिंग के बाद बीते दो मार्च से भोजपुर में कोरोना को लेकर जिस तरह से युद्ध स्तर पर काम शुरू हुआ, उसके बाद से उन्हें अपने बाल बच्चों का मुंह तक देखना नसीब नहीं हुआ.


पति डॉक्टर तो बेटी कर रही है मेडिकल की पढ़ाई
परिवार में डॉ. अर्पणा के बीमार बुजुर्ग पिता, बुजुर्ग मां, मेडिकल की पढ़ाई कर रही बेटी और चिकित्सक पति हैं. उन्होंने बताया कि कोरोना के संक्रमण के खतरे को देखते हुए वे उनसे फोन पर ही बातचीत कर पाती हैं. डॉ. अर्पणा और उनकी टीम के समर्पण का ही यह परिणाम है कि भोजपुर में कोरोना का चेन लगभग टूट चुका है. भोजपुर में बेहतर इलाज के कारण यहां पाए गए 36 संक्रमितों में से 18 स्वस्थ होकर अपने घर भी जा चुके है.

Sources:-News18

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