भाजपा का अब्दुल बारी सिद्दीकी को सुझाव, ‘परिवार के साथ पाकिस्तान जाएं’, अपने बच्चों को सलाह देकर फंसे RJD नेता

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राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी के बयान के बाद बिहार की राजनीति में उबाल आ गया है। भाजपा के नेता राजद नेता को पाकिस्तान जाने की सलाह दी जा रही है। साथ ही राजद पर धर्म की राजनीति करने के आरोप लगे हैं। बिहार भाजपा के प्रवक्ता निखिल आनंद ने भड़काऊ बयान देकर सिद्दीकी किसे खुश करना चाहते हैं? बेहतर होगा कि वह पाकिस्तान चले जाएं। वहीं भाजपा विधायक रामसूरत राय ने कहा कि अब्दुल बारी सिद्दीकी से यह क्यों नहीं पूछा जाना चाहिए कि अपने बेटे-बेटी को तो इंग्लैंड में पढ़ा लिया लेकिन बिहार के गरीब मुसलमानों के बच्चों की पढ़ाई के लिए क्या किया?

बिहार भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि राजद नेता सिद्दीकी के बयान निंदनीय है। ये लोग मदरसा संस्कृति से अभी भी बाहर नहीं निकल पाए हैं। ऐसे ही लोग सेक्युलरिज्म व लिबरलिज्म के मुखोटे में राष्ट्रविरोधी व धार्मिक एजेंडा चलाते हैं। सिद्दीकी का बयान आरजेडी की विचारधारा को परिलक्षित करता है। उन्होंने कहा कि सिद्दीकी भारत में रह रहे हैं और भारत की थाली में खा रहे हैं लेकिन कट्टरपंथियों के इशारों पर गा रहे हैं और विक्टिम कार्ड खेलकर देशविरोधी ज्ञान दे रहे हैं।

दरअसल, ये पूरा विवाद राजद नेता के एक बयान के बाद आया था, जिसमें उन्होंने अपने बच्चों को सलाह दी थी कि माहौल ठीक नहीं है। अगर विदेश में नौकरी मिलती है, तो ले लो। नागरिकता मिलती है तो वहीं बस जाओ। उनकी इस सलाह पर विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, अपनी सफाई में सिद्दीकी ने गुरुवार को कहा कि एजेंडा के तहत उन्हें घेरा जा रहा है। ऐसा कुछ नहीं कहा जो राष्ट्रविरोधी हो। सिद्दीकी ने कहा कि उनकी सलाह का बेटे ने भी विरोध किया। बेटा का कहना था कि हम बालिग हैं। कहां रहेंगे, कहां नौकरी करेंगे, इसके बारे में सलाह देने का अधिकार आपको नहीं है।

गुरुवार को दैनिक जागरण से बातचीत में सिद्दीकी ने कहा कि बच्चों को ऐसी सलाह देने में कोई बुराई नहीं है। ऐसा कोई सर्वेक्षण हो तो पता चले कि तथाकथित देश भक्तों के कितने बाल बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं। नौकरी कर रहे हैं और नागरिक भी है। सिद्दीकी ने कहा कि सभापति के सम्मान समारोह में न्यायपालिका से जुड़े लोग भी थे। वे सहज भाव से अपनी बात कह रहे थे। किसी ने विरोध नहीं किया। समारोह के पांच दिन बाद भाजपा अपने एजेंडा के हिसाब से आलोचना कर रही है।

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