रथयात्रा के पहले बीमार हो जाते हैं भगवान, ऐसे होती है चिकित्सा

आस्था

हिन्दू सनातन धर्म में खास बात ये है कि इसमें भक्त तो भगवान के पीछे रहते ही हैं लेकिन भगवान भी भक्तों के अाधीन रहते हैं. जी हाँ, यहाँ जितना भक्त चाहते हैं भगवान को, उतना ही भगवान भी भक्तों को चाहते हैं. इसी के साथ आपको ये भी खास बात बता दें कि इंसानों की तरह भगवान भी बीमार होते हैं. जी हाँ, ये बात आपको भी हैरान कर रही होगी पर ये सच है. आइये जानते हैं इस सच के बारे में.

जानकारी के लिए बता दें, ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ को ठंडे जल से स्नान कराया जाता है जिसके बाद वो भी ज्वर से पीड़ित हो जाते हैं और उनकी चिकित्सा भी की जाती है. इस दौरान वो करीब 15 दिनों तक एकांत में विश्राम करते हैं जहाँ पर उनके चिकित्सक ही जा सकते हैं और किसी को भी इनके दर्शन नसीब नहीं होते. इस प्रक्रिया को अनवसर कहते हैं. चिकित्सा के दौरान भगवान जगन्नाथ को फ़लों के रस, औषधि एवं दलिया का भोग लगाया जाता है जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधर हो जाये.

इन सब के बाद प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती है जो बहुत ही भव्य होती है. ये यात्रा भगवान के ठीक ही जाने के बाद ही निकाली जाती है जिसमें उन्हें सैर कराई जाती है. इस वर्ष की यात्रा जुलाई की 14 तारीख को निकाली जाएगी जिसमें इनके कई भक्त शामिल होते हैं.

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