तुलसी एक नेचुरल एयर प्यूरिफायर है। ये पौधा 24 में से करीब 12 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है। वनस्पति वैज्ञानिकों के अनुसार कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड व सल्फर डाईऑक्साइड जैसी जहरीली गैस भी सोखता है। तुलसी का पौधा वायु प्रदूषण को कम करता है। तुलसी का पौधा उच्छवास में ओजोन वायु छोड़ता है जिससे सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाव होता है। तुलसी में यूजेनॉल नाम का कार्बनिक योगिक होता है जो मच्छर, मक्खी और कीड़े भगाने का काम भी करता है। 

इस तरह वायु प्रदूषण कम करने के लिये तुलसी का पौधा लगाना फायदेमंद हैं। वहीं धर्मग्रंथों के अनुसार देव उठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है। तुलसी के पौधे का महत्व पद्मपुराण, ब्रह्मवैवर्त, स्कंद और भविष्य पुराण के साथ गरुड़ पुराण में भी बताया गया है। तुलसी का धार्मिक महत्‍व होने के साथ वैज्ञानिक महत्व भी है। यह पौधा शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाने के साथ बैक्‍टीरिया और वायरल इंफेक्‍शन से भी लड़ता है। 

  • तुलसी पूजा

अनेक व्रत और धर्म कथाओं में तुलसी का महत्व बताया गया है। भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कोई भी पूजा तुलसी दल के बिना पूरी नहीं मानी जाती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण की कथा के अनुसार कार्तिक माह के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि पर तुलसी विवाह किया जाता है। इस दिन तुलसी और शालिग्राम विवाह करवाने से हर तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं। वहीं तुलसी विवाह से भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी भी प्रसन्न होते हैं। 

तुलसी का धार्मिक महत्व

  • पद्म पुराण के अनुसार जो दर्शन करने पर सारे पाप-समुदाय का नाश कर देती है, स्पर्श करने पर शरीर को पवित्र बनाती है, प्रणाम करने पर रोगों का निवारण करती है, जल से सींचने पर यमराज को भी भय पहुँचाती है, आरोपित करने पर भगवान श्रीकृष्ण के समीप ले जाती है और भगवान के चरणों में चढ़ाने पर मोक्षरूपी फल प्रदान करती है, उस तुलसी देवी को नमस्कार है।
  • गरुड़ पुराण के धर्म काण्ड के प्रेत कल्प में लिखा है कि तुलसी का पौधा लगाने, उसे सींचने तथा ध्यान, स्पर्श और गुणगान करने से मनुष्यों के पूर्व जन्म के पाप खत्म हो जाते हैं।ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खण्ड में लिखा है कि मृत्यु के समय जो तुलसी पत्ते सहित जल पीता है  वह हर तरह के पापों से मुक्त हो जाता है। 
  • स्कन्द पुराण के अनुसार जिस घर में तुलसी का पौधा होता है और हर दिन उसकी पूजा होती है तो ऐसे घर में यमदूत प्रवेश नहीं करते। स्कन्द पुराण के ही अनुसार बासी फूल और बासी जल पूजा के लिए वर्जित हैं परन्तु तुलसीदल बासी होने पर भी वर्जित नहीं हैं। यानी ये  अपवित्र नहीं मानी जाती। 
  • ब्रह्मवैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में लिखा है कि घर में लगाई हुई तुलसी मनुष्यों के लिए कल्याणकारिणी, धन पुत्र प्रदान करने वाली, पुण्यदायिनी तथा हरिभक्ति देने वाली होती है। सुबह-सुबह तुलसी का दर्शन करने से सवा मासा यानी सवा ग्राम सोने के दान का फल मिलता है।

तुलसी पर वैज्ञानिक रिपोर्ट और रिसर्च

  1. तिरुपति के एस.वी. विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार तुलसी का पौधा उच्छवास में ओजोन वायु छोड़ता है। 
  2. आभामंडल नापने के यंत्र यूनिवर्सल स्केनर के माध्यम से तकनीकी विशेषज्ञ श्री के.एम. जैन द्वारा किए परीक्षण में पता चला कि कोई व्यक्ति तुलसी के पौधे की 9 परिक्रमा करे तो उसका आभामंडल का प्रभाव क्षेत्र 3 मीटर तक बढ़ सकता है।
  3. तिरुपति के एस.वी. विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार तुलसी का पौधा उच्छवास में ओजोन वायु छोड़ता है।
  1. वनस्पति वैज्ञानिक डॉक्टर जी.डी. नाडकर्णी का कहना है कि तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह नियंत्रित होता है और व्यक्ति की उम्र बढ़ती है।फ्रेंच डॉक्टर विक्टर रेसीन का कहना है कि तुलसी एक अदभुत औषधि है।
  2. इम्पीरियल मलेरियल कॉन्फ्रेंस के अनुसार तुलसी मलेरिया की विश्वसनीय और प्रामाणिक दवा है।
  3. डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में पता चला है कि तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट होता है। जो शरीर की मृत कोशिकाओं को ठीक करने में मददगार होता है। तुलसी का प्रभाव शरीर में पहुंचने वाले केमिकल या अन्य नशीले पदार्थों से होने वाले नुकसान को कम करता है। टी.बी-मलेरिया और अन्य संक्रामक रोगों से निपटने के लिए तुलसी कारगर है।

Sources:-Dainik Bhasakar

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