भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) के बीच की तनातनी शुक्रवार को विशेष आम बैठक (एसजीएम) में सामने आ गया. इस बैठक में बोर्ड के पदाधिकारियों और राज्य संघ के प्रतिनिधियों ने उम्मीद के मुताबिक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों के नए कॉन्ट्रैक्ट को स्वीकृति दे दी है.

बीसीसीआई ने इस बैठक में घरेलू खिलाड़ियों के लिए सैलरी का प्रस्ताव पेश किया. बैठक की शुरुआत में 2013 आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में मूल याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा ने बोर्ड के कामकाज की आलोचना के लिए सदस्यों से माफी मांगी.

बोर्ड ने भ्रष्टाचार विरोधी इकाई के नए प्रमुख के रूप में अजीत सिंह की नियुक्ति का विरोध किया और नई नियुक्ति होने तक मौजूदा प्रमुख नीरज कुमार के करार में विस्तार की सिफारिश की.

इसके अलावा, बोर्ड ने सीओए द्वारा पिछले सप्ताह हुई बैठक में उत्तराखंड को मिले रणजी स्तर का दर्जा भी खारिज कर दिया. बोर्ड ने रणजी में दो डिवीजन की घोषणा की और कहा कि नए सीजन में 28 राज्यों की टीमें एलीट डिविजन में हिस्सा लेंगी, वहीं बिहार और उत्तर-पूर्वी राज्य प्लेट डिविजन में हिस्सा लेंगी.

खिलाड़ियों के नए करार को मिली अनुमति पर बीसीसीआई के कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी ने कहा, “एजीएम ने नए अनुबंधों पर हस्ताक्षर के लिए मुझे अधिकृत किया है. इसके साथ ही मुझे घरेलू क्रिकेट में महिला और पुरुष खिलाड़ियों के वेतन को बढ़ाने का अधिकार दिया गया है. इस मामले में हमें जानकारी मिलने का इंतजार है.”

घरेलू खिलाड़ियों के वेतन में बढ़ोतरी के प्रस्ताव के बारे में अमिताभ ने कहा, “घरेलू क्रिकेट खिलाड़ियों के अनुबंध में वृद्धि का प्रस्ताव मुद्रास्फीति और अन्य सभी तथ्यों पर विचार के बाद रखा गया है, क्योंकि हमारा मानना है कि इससे हमें पता चला है कि उन्हें जो वेतन मिलता है, वह कम है.”

अमिताभ ने कहा कि यह 2017-18 सीजन से प्रभाव में आएगा और इस पर समग्र दृष्टिकोण का जायजा भी लिया जाएगा.

एसजीएम में लिए गए फैसलों पर सीओए की अनुमति के बारे में अमिताभ ने कहा, “हमारी कुछ निश्चित जिम्मेदारियां हैं और सीओए की भी कुछ निश्चित जिम्मेदारियां हैं. हम उनकी निगरानी में अपना काम जारी रखेंगे.”

 

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