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बिहार के बक्सर के बेटे ने एक बार फिर कमाल कर दिया है। जिले के विकास का एनएसडी में सेलेक्शन हो गया है। इससे यहां के लोग काफी खुश हैं।

विकास कुमार गुप्ता बक्सर जिले के गायघाट ब्रम्हपुर के मूल निवासी हैं और दिल्ली में रहकर लगातार रंगकर्म कर रहे हैं। एक छोटे से ग्रामीण परिवेश से आने वाले इस रंगकर्मी ने एम. के. रैना, बापी बोस, डॉली आलुवालिया, रॉबिन दास, अरुण मलिक, हेमा सिंह, जे. पी. सिंह, प्रेम मटियानी जैसे देश के नामचीन निर्देशकों के साथ काम किया है।

कबीरा खड़ा बाजार में, सुखिया मर गया भूख से, एक कंठ विषपायी, गुंडा, किस्सा मौजपुर का, खूबसूरत बला, मोटेराम का सत्याग्रह आदि नाटकों में अभिनय भी किया है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय विश्व के अग्रणी नाट्य प्रशिक्षण संस्थाओं में से एक और भारत में अपनी तरह का एक मात्र संस्थान है।
इसकी स्थापना संगीत नाटक द्वारा उसकी एक इकाई के रूप में साल 1959 में की गई। वर्ष 1975 यह एक स्वतंत्र संस्था बनी व इसका पंजीकरण वर्ष 1860 के सोसायटी पंजीकरण धारा XXI के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था के रूप में किया गया।

यह संस्था संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वित्त पोषित है।

विद्यालय में दिया जाने वाला प्रशिक्षण गहन, संपूर्ण एवं व्यापक होता है जिसमें सुनियोजित पाठ्यक्रम होता है जो कि रंगमंच के हर पहलू को समाहित करता है और जिसमें सिद्धांत व्यवहार से संबंधित होते हैं।


प्रशिक्षण के एक अंश के रूप में छात्रों को नाटक तैयार करने होते हैं जिनको कि बाद में जन समूह के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।

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