बारिश की कमी से मछलियों के उत्पादन को लग सकता है झटका, नुकसान की कगार पर मछलीपालक

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मानसून के बावजूद बिहार में बारिश की कमी इस साल काफी ज्यादा परेशानिया पैदा कर रही है। नवादा जिले में भी बारिश का अभाव कृषि के हर क्षेत्र में नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। बारिश की कमी की वजह से इस साल मछलीपालकों को सफलता हाथ नहीं लगते हुए दिख रही है। इस साल सब गड़बड़ होता प्रतीत हो रहा है। अब तक जो हाल है, अगर ऐसा ही रहा तो बारिश का यह अभाव मछली पालकों को भारी आर्थिक नुकसान दे देगा। एक मोटे अनुमान के अनुसार के लक्ष्य से तीस फीसदी तक कम उत्पादन होने की आशंका है। निश्चित रूप से यह स्थिति बेहद नुकसानदेह साबित होगी। मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा कर बैंक आदि के भरोसे मछली उत्पादन के कारोबार से जुड़े मछलीपालकों के लिए फिर संभलना मुश्किल हो जाएगा। उनकी कमर ही टूट कर रह जाएगी।

जिला मत्स्य विकास पदाधिकारी चितरंजन कुमार ने बताया कि चालू सत्र 2022-23 में 6.35 हजार एमटी मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 2.10 हजार एमटी मछली का उत्पादन जिले में हो भी चुका है। इसके तहत कतला मछली 0.18, रोहू 1, मृगल 0.19, सिल्वर कॉप 0.12, ग्रास कॉर्प 0.13, कॉमन कॉर्प 0.17, कैटफिश 0.08, पंगेसियस 0.10 तथा अन्य मछलियां 0.04 हजार एमटी हैं। यानी लगभग तीस फीसदी लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है। लेकिन बारिश के कारण लगातार तालाबों और जलाशयों के सूखते चले जाने से लक्ष्य पाना मुश्किल होता दिख रहा है।

मत्स्य विकास पदाधिकारी ने बताया कि वर्तमान में जो हाल है, वैसा ही रह गया तो मछली उत्पादन 4-4.5 हजार एमटी से ज्यादा शायद ही हो पाए। यानी लगभग 70 फीसदी ही लक्ष्य पाया जा सकता है। कम से कम तीस फीसदी तक लक्ष्य से पीछे रह जाने की आशंका अभी से ही गहराने लगी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब भी बारिश मध्यम तीव्रता से भी हो जाए तो संकट टल सकता है। मछलीपालक तत्परता से जल संचय कर पाने में सफल होंगे और यह प्रयास संकट निवारक हो सकता है।

जिला मत्स्य विकास पदाधिकारी चितरंजन कुमार ने बताया कि बारिश की अभी प्रबल आवश्यकता है। मछली उत्पादन के लिए अभी की बारिश बेहद कारगार साबित होती है। यह बारिश पूरे सीजन के लिए काम आ जाता है। कायदे से जलसंचयन कर मछलीपालक आने वाले दिनों में भी मछली उत्पादन कर पाने में सक्षम होते हैं। लेकिन अभी बारिश नहीं हो सकी तो पम्पसेट से मछलियों को बचा पाना टेढ़ी खीर साबित होगा। बारिश का अभाव बेहद परेशानीदायक साबित हो सकता है।

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