बढ़ता बिहार, उद्यम विहार: देश में आम उत्पादन में चौथा स्थान, प्रसंस्करण की इकाई नहीं

जानकारी

बिहार में फलों के उत्पादन का 50 प्रतिशत हिस्सा आम का है। इसका विस्तार एक लाख हेक्टेयर में है और वार्षिक उत्पादन 1.5 मिलियन मीट्रिक टन है। आम के उत्पादन में बिहार का पूरे देश में चौथा स्थान है और देश के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत है। बिहार में आम की कई वेरायटी हैं। इनमें अधिक पसंद किए जाने वाले आम में मालदह, बंबई, जर्दालू, जर्दा, सफेदा, सिपिया, शुकुल तथा गुलाबखस हैैं। आम के उत्पादन वाले महत्वपूर्ण जिले में दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, पूर्वी व पश्चिमी चंपारण तथा भागलपुर हैैं। एक समय योजना आयोग ने बिहार के दरभंगा जिले को आम के उत्पादन के व्यवसायीकरण के लिए चिन्हित भी किया था। संकट यह है कि इतने बड़े स्तर पर आम के उत्पादन के बावजूद बिहार में आम की प्रोसेसिंग की कोई यूनिट ऐसी नहीं, जिसका उल्लेख किया जा सके। दूसरे राज्यों में बड़ी संख्या में आम प्रसंस्करण की इकाइयां हैैं। आम के मौसम के बाद बिहार में उन राज्यों से आम के उत्पाद खूब आते हैं।

आम से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों की संभावना पर बात करें तो सबसे पहले यह सवाल उठता है कि आम का किस तरह से औद्योगिक उपयोग है। आम के कितने तरह के उत्पाद तैयार कर उसे बाजार में सुलभ कराया जा सकता है। यह बिहार जैसे राज्य के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रदेश आम के उत्पादन में देश में चौथा स्थान रखता है। एक समय सरकार के स्तर पर आम के फ्लेवर में तैयार रसवंती की खूब चर्चा होती थी। इसके बाद आम के स्वाद वाले कोल्ड ड्रिंक्स बाजार में आए और छा गए। रसवंती का अब कोई अता-पता नहीं।

आम से तैयार हो रहे ये उत्पाद

आम से तैयार होने वाले उत्पादों में मैैंगो पल्प और जूस के बारे में सभी को पता है। पर इसके अलावा भी आम से कई तरह के उत्पाद तैयार होते हैैं। इनमें कच्चे आम का अचार, फ्रूट सास, फ्रूट काकटेल्स, ड्राइड मैैंगो स्लाइस, मैैंगो वाइन, ग्लेजिंग्स, जैम, जेली, फ्लेवर्ड योगहर्ट, आइसक्रीम व आयुर्वेदिक दवाएं आदि शामिल हैैं।

बिहार में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत 23 उत्पादों को लिया गया है। इनमें केवल तीन जिले में ही आम को जगह दी गई है। इन जिलों में अरवल, मधेपुरा तथा जर्दालू आम के लिए भागलपुर जिला शामिल है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट का फायदा यह है कि इससे जुड़े उद्योगों में निजी या फिर समूह में कोई यूनिट लगाई जाती है तो उसे सरकार के स्तर पर मदद मिलेगी। यह सहायता कामन इंफ्रास्ट्रक्चर, विपणन तथा ब्रांडिंग के लिए होगी।

गुणवत्ता आ रही आड़े

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष केपीएस केसरी कहते हैैं कि बिहार में आम बहुत है, पर प्रसंस्करण इकाई के नहीं रहने की वजह आम की गुणवत्ता है। इसका प्रसंस्करण कठिन है। यहां का आम टेबल वेरायटी यानी सीधे-सीधे उपभोग वाला है। इसके बावजूद छिटपुट तरीके से प्रसंस्करण की कुछ यूनिट मुजफ्फरपुर व हाजीपुर में हैैं।

आम के निर्यात की बड़ी संभावना

क्वालिटी टेबल वेरायटी होने की वजह से बिहार के आम खूब पसंद किए जाते हैैं। इसलिए दूसरे राज्यों में इसके निर्यात की खूब संभावना है। यह आम के किसानों की आय का बड़ा साधन भी हो सकता है। बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन का कहना है कि इस दिशा में कुछ काम शुरू हुआ है। कोरोना की वजह से बीच में बाधा आई थी। अब फिर से इसपर काम चल रहा है। यह काम अगर संस्थागत तरीके से हो तो बड़ी सफलता मिल सकती है। बिहार के जर्दालू को बाहर भेजा भी गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.