अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. वहीं इस बीच शहर के कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि जिस जगह पर राम मंदिर का निर्माण प्रस्तावित है, वहां 5 एकड़ जमीन पर पुरानी कब्रें हैं. ऐसे में वहां पर मंदिर बनाना उचित नहीं होगा. अयोध्या के राम मंदिर के मुख्य पुजारी का कहना है कि इस जमीन पर कोई कब्रिस्तान नहीं था. हां, पहले के समय में यहां ऋषि मुनियों की समाधियां थीं. इस जमीन पर हमेशा से पूजा और शंखनाद होता रहा है, उससे सब कुछ शुद्ध हो जाता है.

माना जाता है कि जिस घर में शंख होता है वहां मां लक्ष्मी का निवास होता है.

पुजारी जी का कथन चाहे जो भी हो, लेकिन हिंदू धर्म में शंख का विशेष धार्मिक महत्व है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी. यही वजह है कि कहीं-कहीं इसका उल्लेख धन की देवी मां लक्ष्मी के भाई की तरह भी होता है. यह भी माना जाता है कि जिस घर में शंख होता है, वहां मां लक्ष्मी का निवास होता है. यही वजह है कि धार्मिक उत्सवों और मांगलिक कार्यों और पूजा पाठ की शुरुआत शंखनाद के साथ की जाती है. शंख की ध्वनि को भी काफी शुद्ध माना जाता है. आइए जानते हैं हिंदू धर्म में शंख का महत्व….

तीन प्रकार के हैं शंख :

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शंख तीन प्रकार के माने गए हैं- दक्षिणावर्ती शंख, मध्यावर्ती शंख और वामावर्ती शंख. हर शंख का अलग-अलग धर्मिक महत्व एवं अर्थ है.

वैज्ञानिक ऐसा मानते हैं कि इसकी ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है

दक्षिणावर्ती शंख है सबसे शुभ:हिंदू धर्म शास्त्रों में दक्षिणावर्ती शंख को सबसे शुभ माना गया है. मान्यताओं के अनुसार, अगर आप मां लक्ष्मी की कृपा चाहते हैं तो अपने पूजाघर में दक्षिणावर्ती शंख जरूर स्थापित करें. यह भी माना जाता है कि इस शंख में इतनी सकारात्मक शक्तियां होती हैं कि यदि कोई चाहे भी तब भी आपको नुकसान नहीं पहुंचा सकता है. तांत्रिक दृष्टि से भी इसका काफी महत्व है. माना जाता है कि जिस घर में दक्षिणावर्ती शंख का इस्तेमाल होता है बुरी शक्तियां उससे कोसों दूर रहती हैं.

मध्यावर्ती शंख:
मध्यावर्ती शंख को भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है. हालांकि पूजा पाठ में इस शंख का इस्तेमाल करने का प्रचलन नहीं

Sources:-News18

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