औषधीय गुणों से युक्त यह सब्जी बिलुप्त होने की कगार पर, अब कुत्ते कर रहे हैं इसकी रखवाली

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साग यानी सब्जी की तो बहुत क्वालिटी आप जानते होंगे. पर कभी रानी साग का नाम सुना है.रानी का साग नाम सुनकर आपको आश्चर्य हो रहा होगा, लेकिन मिथिलांचल में रानी के साग को लोग काफी स्वादिष्ट व्यंजन मानते हैं. अपने घरों में बहुत ही शौक से बनाते हैं, पर यह अब विलुप्त हो चुकी है. कुछ जगहों पर लोग अपनी बागवानी में इसे सजा कर रखे हुए हैं. साथ में इसकी निगरानी के लिए देसी कुत्ते भी पाल रखे हैं. आज आपको इस साग की पूरी जानकारी देंगे.

ह 15 दिनों के अंदर फिर से घने हो जाती है

इसको लगाने वाले सौरभ चौधरी ने बताया कि प्राय: यह मिथिलांचल क्षेत्र में पाया जाता है. इसे बनाना बहुत ही आसान है. साथ में स्वादिष्ट भी है इसमें कई सारे औषधीय गुण भी छुपे हुए हैं. इसीलिए यह साग अपने आप में खास हो जाता है. इस साग की खासियत यह है कि इसे आप तोड़कर अपने स्वादिष्ट व्यंजनों में शामिल भी कर लें तो यह 15 दिनों के अंदर फिर से घने हो जाते हैं. बस इसे ठंड और बरसात से बचाकर रखना होता है. क्योंकि नाजुक डालिया होने की वजह से यह ठंड में और बरसात में गल जाते हैं.

यह खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता

स्थानीय व्यक्ति जो इस साग को अपने गार्डन में लगाए हुए हैं. इनका नाम है सौरभ चौधरी. वह बताते हैं कि यह बहुत ही कम जगह पर मिलता है और सीमित क्षेत्र में ही मिलता है. इसलिए शायद इसे रानी का साथ कहा जाता है . यह खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता है. हम लोग इसे अपने गार्डन में सजा कर भी रखे हुए हैं. यह गार्डन की शोभा भी बढाता है और इसमें कई सारे औषधि गुण भी पाए जाते हैं .

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