बिहार के छात्र का 30 देशों के वैज्ञानिकों ने माना लोहा, प्लास्टिक से पेट्रोल व एलपीजी बना रहा विनीत

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16 साल की उम्र में औरंगाबाद के विनीत ने वो कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े देशों के वैज्ञानिक नहीं कर पाये हैं. विनीत ने एक ऐसा अाविष्कार किया है, जिससे देश ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों का भी ध्यान उसकी ओर आकर्षित हो गया है.    शहर के सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज के इंटर साइंस में पढ़नेवाले औरंगाबाद प्रखंड के देवहरा गांव निवासी धनेश प्रजापति व सुनीता देवी के पुत्र विनीत कुमार ने प्लास्टिक से पेट्रोल, एलपीजी व टाइल्स बनाने की तरकीब निकाली है. फिलहाल वो बेकार पड़े प्लास्टिक से पेट्रोल व एलपीजी बना रहा है. विनीत ने बताया कि एक किलो प्लास्टिक से 800 ग्राम पेट्रोल, 200 ग्राम एलपीजी तैयार होती है और जो अवशेष बच जाता है, उससे टाइल्स बनाता है. वह अपने इस आविष्कार को बड़ा रूप देना चाहता है.  

विनीत की पेंसिल जल-जीवन-हरियाली को दे रही आयाम   विनीत द्वारा बनायी गयी पेंसिल सरकार की जल जीवन हरियाली अभियान को सफलता का आयाम दे रही है. विनीत ने कागज की पेंसिल बनायी है, जो उपयोग कर फेंकने के बाद मिट्टी में सड़ जायेगी. पेंसिल के पीछे भाग में पौधे के बीज हैं, जिसे फेंकने के बाद पौधे उग जायेंगे. विनीत ने बताया के एक पेंसिल बनाने के लिए एक पेड़ को काटना पड़ता है.    लेकिन, पेड़ उगाने की कोई नहीं सोचता. पेड़-पौधा बचाने के उद्देश्य से इस पेंसिल को तैयार किया है.  कागज व अखबार के टुकड़े को गला कर बीजयुक्त पेंसिल को तैयार किया गया है.  

कई देशों ने किया है सम्मानित   विनीत को कई देशों ने सम्मानित किया है. पिछले महीने दिसंबर में हैदराबाद में हुए इंटरनेशनल इनोवेटिव फेयर में दुनिया के 30 देशों ने भाग लिया था. विनीत ने बिहार का नेतृत्व किया था. इन देशों के वैज्ञानिक विनीत की प्रतिभा देख कर दंग रह गये. इनमें से छह देश पोलैंड, पुर्तगाल, चाइना, क्रोटिया, ब्राजील व साउथ अफ्रीका ने अपने यहां रिसर्च के लिए आमंत्रित किया है. यूरोप, पुर्तगाल जैसे देशों ने उसे बेस्ट इनोवेटर का पुरस्कार दिया है. उसने पीएमओ व इसरो ने भी विनीत की सराहना की है.  

अब तक 17 अाविष्कार कर चुका है विनीत   विनीत ने प्रभात खबर से बातचीत के दौरान बताया कि वो अब तक 16 प्रकार का अाविष्कार कर चुका है. उसने कई नयी चीजें बनायी हैं, जिससे वो पीएमओ और इसरो के अलावे 30 देशों के प्रतिनिधियों को दिखा चुका है.    हाल में ही उसने हैदराबाद में सभी अाविष्कारों को प्रदर्शित किया था. इन सभी चीजों के अलावा उसने प्लास्टिक के बोतल का इस्तेमाल कर मशरूम की खेती करने की भी तरकीब निकाली है.उसने बताया कि बाहर उसे खूब सराहना मिल रही है, पर जिले के अंदर किसी ने मौका नहीं दिया. वह जिले के लिए कुछ बेहतर करना चाहता है.  

बाल से तैयार करता है जैविक खाद   विनीत ने बताया कि महिलाएं जो बाल झाड़ने के बाद फेंक देती हैं और सैलून में बालों का जो ढेर जमा रहता है, उस बाल को संधारित कर रासायनिक प्रक्रिया से जैविक खाद का निर्माण किया जाता है. जैविक खाद बनाने के लिए बालों को पहले जलकुंभी के साथ मिलाकर उच्च तापमान पर उबाला जाता है, जिससे पोरस बन जाता है. फिर दोनों को सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है. जब बाल व जलकुंभी सड़ जाता है, तो फिर उसे उपकरण के माध्यम से जैविक खाद तैयार किया जाता है.  

सात प्रक्रियाओं के बाद बनाता है पेट्रोल   सबसे पहले प्लास्टिक को जमा कर उसे उच्च तापमान पर रासायन की मदद से गलाया जाता है. जहां प्लास्टिक गलता है, वहां ऑक्सीजन की मात्रा न के बराबर होती है. प्लास्टिक गलने के बाद गैस के रूप में परिवर्तित हो जाता है. फिर मशीन के अंदर गैस के साथ केटेलाइटिक रिडक्शन की प्रक्रिया होती है.    उत्प्रेरक के साथ गैस को रिएक्ट कराकर हाइ नाइट्रोजन से पास किया जाता है, जिसके बाद लिक्विड में बदल जाता है. इसके बाद ये इथिन बन जाता है, जिससे पेट्रोल व डीजल तैयार होता है. जो पेट्रोल नहीं बन पाता, उससे एलपीजी के रूप में प्राप्त किया जाता है. अवशेष के रूप में मिलने वाले फ्लाईऐश से टाइल्स व ईंट बनता है.

Sources:-Prabhat khabar

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