15 अगस्त: प्रधानमंत्री बनने के बाद भी इन्हें लाल किले पर तिरंगा फहराने का नहीं मिला मौका

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पटना: लाल किले पर झंडा फहराने का सौभाग्य हर किसी को प्राप्त नहीं होता। सिर्फ देश के प्रधानमंत्री को 15 अगस्त को लाल किले पर झंडा फहराने का मौका मिलता है। हर साल 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय धवज तिरंगा फहराते हैं और देश के नाम एक संदेश देते हैं.। लेकिन इतिहास में कई ऐसे प्रधानमंत्री भी रहे हैं, जिन्हें देश का प्रधानमंत्री बनने का सौभाग्य तो मिला लेकिन उसके बाद भी वो लाल किले पर तिंराग नहीं फहरा सके। गुलजारी लाल नंदा और चंद्रशेखर, ऐसे प्रधानमंत्री रहे जो प्रधानमंत्री तो बने लेकिन उन्हें एक बार भी लाल किले की प्राचीर पर चढ़ने का मौका नहीं मिला। इसमें गुलजारी लाल नंदा दो बार देश के प्रधानमंत्री रहे थे।

वहीं कई ऐसे प्रधानमंत्री भी रहे हैं, जिन्होंने 10 से ज्यादा बार लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित किया है।

– जवाहर लाल नेहरू ने 15 अगस्त 1947 से 1964 तक लगातार 17 बार लाल किले पर तिरंगा फहराया। आपको बता दें कि नेहरू ने पहली बार लालकिले पर 15 अगस्त को नहीं बल्कि 16 अगस्त 1947 को तिरंगा फहराया था।

– उसके बाद इंदिरा गांधी ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया है. उन्हें 16 बार इसका सौभाग्य प्राप्त हुआ है. जिसमें 1966 से 1977 के बीच उन्होंने 11 बार लगातार झंडा फहराया.

– इंदिरा गांधी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नंबर है, जिन्होंने 10 बार लाल किले के प्राचीर पर तिरंगा फहराया.

– अटल बिहारी वाजपेयी सबसे ज्यादा बार तिरंगा फहराने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने लगातार छह बार तिरंगा फहराया।

– वहीं राजीव गांधी और नरसिंह राव ने 5-5 बार लाल किले से झंडा फहराया।

– जबकि चौधरी चरण सिंह, वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, लाल बहादुर शास्त्री को ये सौभाग्य सिर्फ 1-1 बार और मोरारजी देसाई को दो बार ही मिल पाया।

Source: News24

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