अति विशिष्ट योग में मनाया जा रहा नवान्न पर्व, मिथिला में इसका अलग स्थान

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अग्रहायण शुक्ल पक्ष पंचमी यानि 28 नवंबर को नवान्न पर्व मनाया जाएगा। वैसे तो इस बार तीन दिन नवान्न का दिन है, जिसमें 28 नवंबर, 30 नवंबर एवं 1 दिसंबर है। मिथिला की परंपरा में नवान्न का बहुत ही अधिक महत्व है। इस दिन विभिन्न नैवेद्य एवं नवीन अन्न के द्वारा भगवान विष्णु को तथा अग्नि देव को आहुति प्रदान की जाती है। नवान्न अर्थात नवीन, नूतन अन्न। चारों तरफ खेतों में हरी-भरी धानों की फसल जब कटकर तैयार होती है, तो पहले पहल उसी नूतन अन्न के द्वारा भगवान विष्णु को एवं अग्नि को आहुति अग्नि प्रज्ज्वलित कर दी जाती है।

इस दिन सर्वप्रथम स्नान इत्यादि करके दीपावली के दिन जो उकापाती खेला जाता है जिसको उल्काभ्रमण कहते हैं। उलकाभ्रमण के उपरांत उस ऊकापाती के बचे कुछ शेष भाग को अपने घर में रखते हैं और जिस रोज नवान्न होता है उस उस ऊकापाती के शेष बचे भाग में अग्नि प्रज्ज्वलित कर अग्नि देव को नैवेद्य, नूतन अन्न के द्वारा आहुति प्रदान की जाती है। इस दिवस मिथिला में दिन के भोजन में नूतन बर्तन में जमाए गए दही और चूड़ा मूली अनेक प्रकार की सब्जी इत्यादि को जिसमें नए-नए सब्जी बना कर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इस बार नवान्न विवाह पंचमी के दिन होने से अति विशिष्ट योग से युक्त है। इसी दिन अर्थात 28 नवंबर को जगत जननी जगदंबा जनक नंदिनी भगवती सीता एवं भगवान राम का विवाह उत्सव मनाया जाता है।

बड़ी संख्या में किसान पहुंचे देवघर और बासुकीनाथ

नवान्न पर्व के मौके पर बिहार के कोसी क्षेत्र से बड़ी संख्या में किसान देवघर और बासुकीनाथ के लिए रवाना हुए। बाबा बैद्यनाथ को दही-चूड़ा का भोग लगाते हुए किसानों ने बाबा की पूजा की। किसान बाबा की पूजा के बाद ही अपने घरों में नवान्न ग्रहण करेंगे।

मिट्टी कला बोर्ड का हो गठन-प्रजापति समाज

बिहार कुम्हार प्रजापति समन्वयक समिति की प्रखंड स्तरीय बैठक कालापट्टी पिपरा में रविवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता सेवानिवृत्त शिक्षक महावीर पंडित ने की। कार्यक्रम की शुरुआत संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर प्रजापतियों ने किया। मंच संचालन राजेश प्रजापति ने किया। इस बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कुम्हार समाज की पूरे बिहार में 90 लाख आबादी है लेकिन इन लोगों की शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीति भागीदारी से काफी पिछड़ी हुई है। हमलोग को जब तक सरकार के द्वारा अनुसूचित जाति ने शामिल नहीं कर लिया जाता है तब तक अपनी मांगों को लेकर एकजुटता से सरकार के विरुद्ध संघर्ष करेंगे। वक्ताओं ने कहा मिट्टी कला बोर्ड का गठन होना चाहिए। हमलोगों का संगठन एक ऐसी ताकत बनकर उभरे कि सरकार भी सोचने पर मजबूर हो।

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